पलायन का दंश झेल रहे नौगांव के कोटला पंचायत को ‘वाइब्रेंट विलेज’ बनाने की मांग, ग्राम प्रधान ने सीडीओ को भेजा पत्र
जखाली, धौंसाली और घुण्ड गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव, तीन-चार मंजिला खाली मकान दे रहे पलायन की मूक गवाही

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
नौगांव uttarkashi: विकासखंड नौगांव की सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत कोटला के ग्रामीणों ने क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और बढ़ते पलायन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ग्राम प्रधान एलम सिंह पंवार ने मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) उत्तरकाशी को पत्र भेजकर क्षेत्र को केंद्र सरकार के ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ की तर्ज पर विकसित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो ये खूबसूरत सीमांत गांव पूरी तरह जनशून्य हो जाएंगे।
सुविधाओं के अभाव में खाली हो रहे हैं पैतृक गांव
सीडीओ को भेजे पत्र में ग्राम प्रधान पंवार ने अवगत कराया कि कोटला पंचायत के अंतर्गत आने वाले जखाली, धौंसाली और घुण्ड गांव विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित बेहद खूबसूरत और प्राकृतिक संपदा से संपन्न क्षेत्र हैं। यहां पर्याप्त मात्रा में जल, जंगल और उपजाऊ भूमि मौजूद है। इसके बावजूद सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बेहद जरूरी मूलभूत सुविधाएं न होने के कारण ग्रामीण यहां से पलायन कर अन्य स्थानों में बसने को मजबूर हो गए हैं।
पर्यटन और ‘रिवर्स पलायन’ की अपार संभावनाएं
ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर है और पर्यटन के लिहाज से अपने भीतर अपार संभावनाएं समेटे हुए है। यदि सरकार यहां सड़कों का निर्माण करने के साथ-साथ स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करे, तो इस क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है। सुदूरवर्ती गांवों को ‘वाइब्रेंट विलेज’ मॉडल के तहत विकसित करने से न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि अन्य स्थानों की ओर जा चुके लोगों की ‘रिवर्स पलायन’ (घर वापसी) भी सुनिश्चित होगी।

कोटला, जखाली, धौंसाली और घुण्ड गांवों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इन्हें विकास कार्यों में विशेष प्राथमिकता दी जाए। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस दिशा में त्वरित और सकारात्मक कार्रवाई करेगा, जिससे उनके उजड़ते हुए पैतृक गांव एक बार फिर से आबाद और जीवंत हो उठेंगे।
इन गांवों में आज भी खड़े तीन-तीन, चार-चार मंजिला दर्जनों खाली पारंपरिक मकान इस पलायन के दर्द की मूक गवाही दे रहे हैं। अब यहां गिने-चुने लोग ही शेष रह गए हैं। अगर इन्हें भी पलायन से रोकना है, तो बुनियादी ढांचे को तुरंत मजबूत करना होगा।”— एलम सिंह पंवार, ग्राम प्रधान कोटला, नौगांव विकासखंड



