
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
uttarkashi: वर्ष भर पहले जब प्रकृति के भयानक रौद्र रूप ने धराली-हर्षिल घाटी की शांत वादियों को आंसुओं और तबाही से भर दिया था, तब जीवन जैसे ठहर सा गया था। आज उस त्रासदी की पहली बरसी पर धराली ने न केवल अपने बिछड़े हुए प्रियजनों को याद किया, बल्कि अपनी अटूट जिजीविषा, पुनर्वास और विकास की एक नई इबारत लिखने का संकल्प भी दोहराया।
बुधवार को धराली में आयोजित भावुक श्रद्धांजलि एवं शांति पाठ कार्यक्रम में गूंजती मंत्रध्वनि और सोमेश्वर देवता के आशीर्वाद के बीच दुख की स्मृतियों पर उम्मीदों की नई कोपलें फूटती नजर आईं।
धराली-हर्षिल क्षेत्र में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में वातावरण अत्यंत भावुक था। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य की उपस्थिति में प्रभावित परिवारों और समस्त ग्रामवासियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगतों को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी।
संकट के बाद उबरने की इस यात्रा में स्थानीय आस्था का केंद्र सोमेश्वर देवता की विशेष पूजा-अर्चना की गई, जहां ग्रामीणों ने सुख-समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद मांगा। दिवंगतों की पावन स्मृति को अमर बनाने के लिए जिलाधिकारी ने देवदार के पौधे का रोपण किया। इसके साथ ही, धराली के ग्रामवासियों ने सामूहिक रूप से 101 पौधों का रोपण कर प्रकृति से पुनः तादात्म्य स्थापित करने का एक अनुठा संदेश दिया।
कल्प केदार मंदिर का जीर्णोद्धार: सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनरुत्थान
आपदा के दौरान आस्था के केंद्रों को पहुंची क्षति को संवारने के लिए कल्प केदार मंदिर समिति और ग्रामवासियों ने जिलाधिकारी के समक्ष मंदिर के जीर्णोद्धार, मरम्मत और सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव रखा।
प्रभावित परिवारों से संवाद करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि धराली की त्रासदी पूरे जनपद के लिए एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण समय था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का अंतिम लक्ष्य धराली को केवल पुरानी स्थिति में लाना नहीं, बल्कि इसे पहले से अधिक सुरक्षित, सुदृढ़ और आत्मनिर्भर क्षेत्र के रूप में स्थापित करना है।
यह बरसी केवल त्रासदी के दुख को दोहराने का दिन नहीं थी, बल्कि यह धराली के लोगों के उस अटूट धैर्य और संघर्ष को नमन करने का दिन बनी, जिसने आपदा के मलबे से निकलकर एक सुरक्षित और समृद्ध कल की नींव रखी है।
कार्यक्रम के दौरान उपजिलाधिकारी भटवाड़ी शालिनी नेगी, थानाध्यक्ष हर्षिल प्रदीप तोमर, डीडीएमओ शार्दुल गुसाईं, ग्राम प्रधान धराली अजय नेगी समेत भारी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।



