मोरी के सुनकुण्डी हेलीपैड का रास्ता साफ: सुरक्षा कार्यों और एप्रोच रोड के लिए ₹ 107.71 लाख की वित्तीय स्वीकृति की संस्तुति

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
Dehradun : जनपद उत्तरकाशी के विकासखंड मोरी के अंतर्गत ग्राम सुनकुण्डी (जखोल) में निर्माणाधीन हेलीपैड के अवशेष व सुरक्षा कार्यों का रास्ता साफ हो गया है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने हेलीपैड के हिल साइड कटिंग के बाद पैदा हुए खतरे से निपटने और आवासीय भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ₹107.71 लाख के पुनरीक्षित प्राक्कलन को प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के लिए शासन को भेज दिया है।
मुख्यमंत्री घोषणा का मामला, राज्य आंदोलनकारी ने की थी मांग
आपको बताते चलें कि यह मामला मुख्यमंत्री घोषणा संख्या 291/2018 के तहत ग्राम सुनकुण्डी (जखोल) में हेलीपैड निर्माण से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2021 में इस कार्य के लिए प्रथम चरण में ₹115.32 लाख की धनराशि स्वीकृत हुई थी, जिससे लोक निर्माण विभाग पुरोला द्वारा हेलीपैड का मूल निर्माण कार्य पूर्ण कराया गया था।
हालांकि, निर्माण के दौरान हिल साइड कटिंग के कारण हेलीपैड के ऊपरी हिस्से में 20 से 25 मीटर की ऊंचाई आने से पूरे गांव और पास के आवासीय भवनों को खतरा पैदा हो गया था। इसके समाधान के लिए उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति रवांई यमुना घाटी के उपाध्यक्ष जयवीर सिंह रावत द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शासन को पत्र लिखकर अवशेष कार्यों व सुरक्षा दीवार के लिए बजट जारी करने का लगातार अनुरोध किया जा रहा था।
यूकाडा ने जांच के बाद शासन को भेजी रिपोर्ट
नागरिक उड्डयन विभाग के अनुसचिव राजेश कुमार के निर्देशों के क्रम में, यूकाडा (UCADA) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच कराई।
यूकाडा के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय सिंह टोलिया द्वारा अनुसचिव को भेजे गए आधिकारिक पत्र के अनुसार, पूर्व में लोनिवि पुरोला द्वारा ₹234.60 लाख का पुनरीक्षित आगणन भेजा गया था। इसके बाद मुख्य अभियंता (क्षेत्रीय कार्यालय, लोनिवि देहरादून) द्वारा मौका मुआयना और गहन तकनीकी जांच कराई गई। जांचोपरांत 80 मीटर लंबाई में एप्रोच रोड और प्रभावित आवासीय भवनों की सुरक्षा के लिए केवल ₹107.71 लाख की धनराशि को ही पूरी तरह औचित्यपूर्ण पाया गया।
यूकाडा द्वारा इस ₹107.71 लाख के संशोधित प्रस्ताव को मूल रूप में संस्तुति सहित अग्रतर कार्रवाई के लिए नागरिक उड्डयन अनुभाग, उत्तराखंड शासन को प्रेषित कर दिया गया है।



