पुरोला: सिंचाई विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर-पार की जंग, सामाजिक कार्यकर्ता टीपीएस भंडारी का बेमियादी आमरण अनशन शुरू

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
पुरोला,uttarkashi: पुरोला में सिंचाई विभाग में फैले कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ बिगुल बज चुका है। विभाग की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर सामाजिक कार्यकर्ता टीपीएस भंडारी ने सोमवार से सिंचाई विभाग कार्यालय परिसर में ही बेमियादी आमरण अनशन शुरू कर दिया है। भंडारी के अनशन पर बैठते ही विभागीय अधिकारियों और अभियंताओं में हड़कंप मच गया है।
वर्षों से सुलग रहे थे सवाल, अब फूटा गुस्सा
सिंचाई विभाग पुरोला की कार्यशैली पर पिछले कई वर्षों से लगातार गंभीर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विभाग में पारदर्शिता नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। टेंडर प्रक्रिया में धांधली, निर्माण कार्यों के लिए पारदर्शी तरीके से निविदाएं (टेंडर्स) आमंत्रित न करना। ठेकेदारों से साठगांठ, अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए बैकडोर से कार्य आवंटित करना। नियमों को ताक पर रखकर कई अभियंताओं और कर्मचारियों का सालों से एक ही स्थान पर टिके रहना।
सामाजिक कार्यकर्ता टीपीएस भंडारी ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, अनशन जारी रहेगा। उन्होंने केवल भ्रष्टाचार की जांच ही नहीं, बल्कि सिंचाई विभाग पुरोला के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की चल-अचल संपत्ति की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी उठाई है।
अभियंताओं और कर्मचारियों में मची खलबली
सोमवार सुबह जैसे ही टीपीएस भंडारी दरी बिछाकर अनशन पर बैठे, विभाग के भीतर का माहौल गरमा गया। लंबे समय से मनमानी कर रहे अभियंताओं के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। अब देखना यह होगा कि जनआक्रोश और आमरण अनशन के आगे शासन-प्रशासन कब तक मौन रहता है या भ्रष्टाचार के इस खेल पर कोई ठोस कार्रवाई करता है।
”सिंचाई विभाग के अधिकारियों को लगता है कि कोई उनके खिलाफ आवाज उठाने वाला नहीं है। विभाग की इसी उदासीनता और निष्क्रियता के विरोध में संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से मुझे अनशन पर बैठना पड़ा है।” टीपीएस भंडारी (सामाजिक कार्यकर्ता)



