बाल विवाह पर प्रशासन की सख्ती, दो दिन में दूसरी शादी रुकवाई

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
Rudraprayaag: व्यापक प्रचार प्रसार और जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद समाज में बाल विवाह गंभीर रोग की तरह फैल रहा है। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास द्वारा लगतार किए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों से इस वर्ष अब तक 26 मामले रुकवाए जा चुके हैं। इसी क्रम में स्वयं नाबालिक बालिका द्वारा परिजनों द्वारा उसके गुपचुप विवाह करवाए जाने की सूचना चाइल्ड सूचना को प्रदान की गई।
सूचना मिलते ही जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ अखिलेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर वन स्टॉप सेंटर से केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रंजू खन्ना, सदस्य ममता शैली, दलवीर सिंह रावत तथा चाइल्ड हेल्पलाइन से केस वर्कर अखिलेश एवं सामाजिक कार्यकर्ता पूजा भंडारी, तिलवाड़ा चौकी से कांस्टेबल डी सी पुरोहित सहित बालिका द्वारा बताए गए पते पर पहुंचे। पहले घरवालों द्वारा टीम को अलग तरह की बात करके बरगलाने की कोशिश की गई। बाद में टीम द्वारा सख्ती बरतने पर बालिका की मां द्वारा बताया गया कि वो देहरादून में रहते हैं जहां पड़ोस में किसी गैर बिरादरी नशेड़ी युवक से प्रेम प्रसंग होने के कारण और लड़की द्वारा घरवालों को घर से भागने की धमकी देने के कारण उन्हें ये कदम उठाना पड़ा।
गौरतलब है कि लड़की का विवाह आज ही रात होने जा रहा था जिसमें बहुत कम रिश्तेदारों को आमंत्रित किया गया था। टीम द्वारा घरवालों को बताया गया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और ऐसा विवाह करवाए जाने पर 2 वर्ष की सख्त सजा और 1 लाख रुपया जुर्माना है। घरवालों द्वारा तुरंत लड़के के घर में बात करके बारात न लाने की बात की गई। टीम द्वारा घरवालों को उन्हें यूसीसी की जानकारी भी प्रदान की गई जिसके तहत बाल विवाह करवाने पर सख्त दंड का प्रावधान है और सख्त चेतावनी दी गई कि किसी भी स्थितियों बाल विवाह न किया जाए।



