प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ी धांधली का खुलासा, नौगांव बीडीओ कार्यालय पर ग्रामीणों का ज़ोरदार प्रदर्शन

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
नौगांव,uttarkashi: नौगांव विकासखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े स्तर पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। योजना के तहत अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने और वास्तविक रूप से ज़रूरतमंद व पात्र परिवारों को सूची से बाहर रखने के आरोपों के बाद स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि खंड विकास अधिकारी कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कार्यालय पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए किए गए सर्वे में भारी धांधली हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सर्वे करने वाली टीम ने लोगों से ₹5,000 से लेकर ₹10,000 तक की रिश्वत ली। आरोप है कि जिन संपन्न लोगों ने पैसे दिए, उनके पक्के मकान होने के बावजूद उन्हें योजना के लिए ‘पात्र’ घोषित कर दिया गया, जबकि जो गरीब और असहाय लोग पैसे नहीं दे पाए, उन्हें अपात्र बताकर सूची से बाहर कर दिया गया।
ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि वर्तमान सूची को निरस्त कर ग्राउंड जीरो पर दोबारा निष्पक्ष तरीके से सर्वे कराया जाए। स्थानीय प्रधान संगठन के प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह समस्या सिर्फ एक ग्राम पंचायत की नहीं, बल्कि पूरे ब्लॉक की है।
खंड विकास अधिकारी ने इस मामले पर उच्चाधिकारियों से वार्ता करने और जांच का आश्वासन दिया है। हालांकि, ग्रामीण प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से असंतुष्ट दिखे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस भ्रष्टाचार के खिलाफ संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई और पात्र परिवारों को उनका हक नहीं मिला, तो वे जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय के बाहर उग्र आंदोलन करने के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे।
संपादकीय : यह एक गहरा प्रश्नचिह्न है कि जब देश की सबसे महत्वाकांक्षी और संवेदनशील योजनाओं में से एक ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत कंसोला गांव के एक दिव्यांग और नेत्रहीन व्यक्ति का नाम सूची से काट दिया जाता है और वह आज भी एक जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं।
यह घटना सीधे तौर पर उस जमीनी हकीकत को उजागर करती है, जहां सरकारी योजनाएं कागजों पर तो चमकती हैं, लेकिन धरातल पर आते-आते अपना मूल उद्देश्य खो देती हैं। एक ऐसा समाज और तंत्र जहां सबसे कमज़ोर और असहाय व्यक्ति को उसका हक पाने के लिए रिश्वत की सीढ़ियां चढ़नी पड़ें, वहां ‘सुशासन’ का दावा बेमानी लगने लगता है। जब पक्के मकानों वाले संपन्न लोग कथित तौर पर पैसों के दम पर ‘पात्र’ बन जाते हैं और एक नेत्रहीन दिव्यांग को ‘अपात्र’ घोषित कर दिया जाता है, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की हत्या है।
यह मामला केवल नौगांव ब्लॉक तक सीमित नहीं हो सकता। यह इस बात का संकेत है कि ब्लॉक स्तर से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक जवाबदेही की कितनी भारी कमी है। यदि सर्वे करने वाली टीमों और स्थानीय अधिकारियों पर पारदर्शिता की कोई बंदिश नहीं होगी, तो लोक-कल्याणकारी योजनाएं इसी तरह बिचौलियों और भ्रष्टाचारियों की अनैतिक कमाई का जरिया बनी रहेंगी।
नौगांव में ग्रामीणों का फूटा यह आक्रोश शासन-प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अधिकारियों को बन्द कमरों से निकलकर ‘ग्राउंड ज़ीरो’ पर देखना होगा कि असल हकदार कौन है। इस मामले में केवल उच्चाधिकारियों से वार्ता का आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लेना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को तुरंत इस पूरे ब्लॉक में निष्पक्ष और पारदर्शी पुन: सर्वे का आदेश देना चाहिए।
समय आ गया है कि इस भ्रष्टाचार के दोषियों को चिन्हित कर ऐसी अनुकरणीय कार्रवाई की जाए, जिससे यह साबित हो सके कि सरकार की योजनाएं वास्तव में ‘गरीब कल्याण’ के लिए ही हैं, किसी ‘अमीर’ या ‘भ्रष्टाचारी’ की जेब भरने के लिए नहीं। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो जनता का इस व्यवस्था से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।



