सत्यमेव जयते: प्रतापनगर मामले में बदला समीकरण, मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि के बाद पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
नई टिहरी: प्रतापनगर क्षेत्र का बहु-चर्चित केतन हत्याकांड अब एक नए मोड़ पर आ गया है। पूर्व में जिसे पूरी तरह जातिगत रूप देकर प्रचारित किया जा रहा था, उसमें अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है। मामले में पुलिस ने मृतक केतन लाल के दोस्त दिवाकर डिमरी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई पीड़िता (नाबालिग किशोरी) की मां की तहरीर और मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद की गई है।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सामने आया सच
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित पक्ष (किशोरी के परिजनों) का आरोप था कि शुरुआत में पुलिस द्वारा उनकी कोई सुनवाई नहीं की जा रही थी, जिसके बाद नाबालिग की मां ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट के निर्देश पर जब नाबालिग किशोरी का मेडिकल परीक्षण करवाया गया, तो उसमें जबरदस्ती (दुष्कर्म) किए जाने की पुष्टि हुई।
क्या था पूरा मामला?
• घटना की तारीख: बीते 7 जून की रात्रि को यह मामला सामने आया था, जिसमें 8 जून को इलाज के दौरान कथित तौर पर दलित युवक केतन की मौत हो गई थी।
• पूर्व में दर्ज मामला: शुरुआत में इस मामले को लेकर लंबगांव थाने में हत्या और एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें किशोरी के पिता और दादा सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
• ताजा शिकायत: नाबालिग की मां द्वारा दी गई तहरीर के मुताबिक, 7 जून की रात को केतन और उसका दोस्त दिवाकर डिमरी उनके घर में घुसे थे और उनकी नाबालिग बेटी के साथ जबरदस्ती की थी।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
थानाध्यक्ष डीपी काला और सीओ टिहरी चंद्रमोहन सिंह ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि कोर्ट के आदेश और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर लंबगांव थाने में पोक्सो व दुष्कर्म की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच अधिकारी उपनिरीक्षक (महिला एसआई) हेमलता को सौंपी गई है, जिन्होंने जांच तेज कर दी है और अग्रिम विवेचना के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
कानून और न्याय व्यवस्था में किसी भी मामले को केवल एक नजरिए या केवल जातिवाद के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। जब दोनों पक्षों के तथ्य और मेडिकल रिपोर्ट सामने आती है, तभी सच उजागर होता है। कानून के समक्ष सभी समान हैं और ‘सत्यमेव जयते’ के सिद्धांत के तहत जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ रही है।



