सिस्टम की बेरुखी: तीन दशक बाद भी हलारा और घियागाड खड्ड का स्थाई समाधान नहीं, जान जोखिम में डालकर आवाजाही को मजबूर ग्रामीण

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मोेरी,uttarkashi: विकास के तमाम दावों और ‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में उत्तरकाशी के सीमांत मोरी ब्लॉक से एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है, जो व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है। गोविंद वन्य जीव विहार राष्ट्रीय पार्क क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सांकरी-तालुका-ओसला मोटर मार्ग पर स्थित हलारा और घियागाड खड्ड पिछले तीन दशकों से स्थानीय ग्रामीणों के लिए जी का जंजाल बने हुए हैं। हर साल की तरह इस बार भी बरसात शुरू होते ही इन खड्डों में भारी बाढ़ आ गई है, जिससे क्षेत्र के चार गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट चुका है।
सांकरी-तालुका मोटर मार्ग पिछले एक सप्ताह से बंद है। इसके कारण पार्क क्षेत्र के तालुका, ओसला, पवांणी, गंगाड़ और ढाटमीर के ग्रामीणों का बाहरी दुनिया से संपर्क टूट चुका है। आवश्यक सामग्री और आपातकालीन चिकित्सा के लिए ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है। उफनते हुए घियागाड और हलारा खड्ड को पार करने के लिए ग्रामीण सीधे उफनते पानी में उतरकर अपनी जान दांव पर लगा रहे हैं।
तीन दशकों का सफर: वन विभाग से PMGSY तक, पर समाधान शून्य
इस मोटर मार्ग का इतिहास सरकारी विभागों की सुस्ती की गवाही देता है। वर्ष 1980 में वन विभाग द्वारा सांकरी-तालुका मोटर मार्ग का निर्माण किया गया था। वर्तमान में यह मार्ग तालुका से आगे ओसला गांव तक निर्माणाधीन है, जिसके कारण इसे अब सांकरी-ओसला मोटर मार्ग के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2020 से यह सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अधीन है। विभाग बदले, साल बदले और दशक भी बीत गए, लेकिन शासन-प्रशासन आज तक इन दो प्रमुख खड्डों का कोई स्थाई ट्रीटमेंट या पुल का निर्माण नहीं कर पाया है। हर साल मानसून आते ही यह मार्ग कई-कई दिनों के लिए बंद हो जाता है, और जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।
सोशल मीडिया पर फूटा युवाओं का गुस्सा, जनप्रतिनिधियों को किया ट्रोल
सिस्टम की इस घोर लापरवाही से क्षेत्र के युवाओं में भारी आक्रोश है। स्थानीय युवाओं ने हलारा और घियागाड खड्ड को पार करते हुए ग्रामीणों के रोंगटे खड़े कर देने वाले वीडियो सोशल नेटवर्क पर वायरल कर दिए हैं। इसके साथ ही क्षेत्र के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को आड़े हाथों लेते हुए जमकर ट्रोल किया जा रहा है।
युवाओं का तीखा सवाल:
“हर साल इस क्षेत्र के जंगलों और पर्यटन से सरकार को लाखों का राजस्व मिलता है। देश-विदेश के पर्यटक यहां आते हैं। जब यहां से करोड़ों की कमाई हो रही है, तो जनता की सुरक्षा के लिए कुछ लाख रुपये खर्च करके एक अदद पुल क्यों नहीं बनाया जा सकता? हमारे जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव के समय दिखते हैं। अपनी गाड़ियां, घर और संपत्तियां तो सबने चमका लीं, लेकिन 5 साल तक जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।”
एक गंभीर चेतावनी
यह स्थिति किसी बड़े हादसे को दावत दे रही है। यदि समय रहते पीएमजीएसवाई (PMGSY) और स्थानीय प्रशासन ने सुध नहीं ली और यहां पुल निर्माण या स्थाई ट्रीटमेंट की दिशा में कदम नहीं उठाए, तो कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है। पर्यटन से लाखों कमाने वाला यह क्षेत्र आज बुनियादी हक (एक सुरक्षित सड़क) के लिए तरस रहा है। देखना होगा कि इस बार भी प्रशासन गहरी नींद सोया रहता है या ग्रामीणों की इस चीख को सुनकर कोई ठोस कदम उठाता है।



