
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
uttarkashi: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने आज उत्तराखंड के सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हर्षिल क्षेत्र का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास कार्यों की समीक्षा करना, सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा देना और स्थानीय समुदायों व तैनात सैनिकों का मनोबल बढ़ाना था।
हर्षिल पहुँचने पर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सीडीएस का औपचारिक स्वागत किया और उन्हें क्षेत्र की प्रशासनिक गतिविधियों तथा जारी विकास योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की नई पहल
दौरे के दौरान जनरल चौहान ने ‘हर्षिल सांस्कृतिक एवं विरासत केंद्र’ की आधारशिला रखी। यह केंद्र गढ़वाल क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास और यहां की समृद्ध परंपराओं को सहेजने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल स्थानीय संस्कृति का संरक्षण होगा, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन को भी नई ऊंचाई मिलेगी।
’वाइब्रेंट विलेज’ के निवासियों और सैनिकों से संवाद
जनरल चौहान ने सीमावर्ती गांवों की जीवंतता को करीब से देखा।
• बगोरी और मुखवा गांव: सीडीएस ने बगोरी गांव में स्थानीय निवासियों से मुलाकात की और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सराहा। इसके बाद वे मुखवा गांव पहुंचे, जहां उन्होंने प्रसिद्ध मुखवा मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की।
• वाइब्रेंट विलेज अभियान: उन्होंने ग्रामीणों के साथ संवाद करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी की प्रशंसा की।
• सैनिकों का उत्साहवर्धन: दुर्गम परिस्थितियों और कठिन मौसम में तैनात भारतीय सेना के जवानों से मिलकर जनरल चौहान ने उनकी पेशेवर क्षमता और उच्च स्तरीय ऑपरेशनल तत्परता की सराहना की।
यह दौरा न केवल सीमा सुरक्षा की दृष्टि से अहम है, बल्कि यह नागरिक-सैन्य संबंधों को और अधिक सशक्त बनाने की भारतीय सशस्त्र बलों की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। सीडीएस के इस दौरे ने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों का समेकित विकास और सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण देश की प्राथमिकता है।



