यमुनाघाटी के नकोड़ा-कपोला गांव का मामला : सड़क के अभाव में डंडी के सहारे जिंदगी, रात के अंधेरे में प्लास्टिक की कुर्सी पर 7 किमी चलकर अस्पताल पहुंचाई गई बीमार महिला
ग्रामीणों ने दी 2027 से पहले सड़क न बनने पर उग्र आंदोलन और बहिष्कार की चेतावनी

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
बड़कोट uttarkashi: एक तरफ जहां राज्य में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र के यमुनाघाटी स्थित नौगांव ब्लॉक के नकोड़ा-कपोला गांव से बदहाल व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। गांव में सड़क संपर्क न होने के चलते आपात स्थिति में ग्रामीणों को आज भी मरीजों को डंडी-कंडी और कुर्सियों के सहारे कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ रहा है।
ताजा मामला 3 नवंबर की रात का है। रात करीब 10 बजे गांव की निवासी मीना देवी (सुपुत्री बलबीर सिंह) की तबीयत अचानक बिगड़ गई। गांव तक एंबुलेंस या कोई अन्य वाहन पहुंचने का मार्ग न होने के कारण ग्रामीणों ने आनन-फानन में प्लास्टिक की कुर्सी को डंडों से बांधकर एक अस्थायी पालकी (डंडी) तैयार की। इसके बाद टॉर्च और मोबाइल की रोशनी के सहारे पथरीले व दुर्गम रास्तों पर करीब 7 किलोमीटर पैदल चलकर मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाया गया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जा सका।
हर महीने दोहराया जाता है यही दर्द
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं है। हर एक-दो महीने में गांव में किसी न किसी ग्रामीण या गर्भवती महिला की तबीयत अचानक खराब हो जाती है और उन्हें इसी तरह जान जोखिम में डालकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शासन और प्रशासन के समक्ष सड़क निर्माण की गुहार लगाई, लेकिन आज तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उपेक्षा से आहत होकर ग्रामीण पहले भी चुनावों का बहिष्कार कर चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
“क्या ऐसे बनेगा उत्तराखंड का दशक?”— ग्रामीणों में भारी आक्रोश
स्थानीय निवासी महाबीर पंवार ‘माही’ ने आक्रोश जताते हुए कहा कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि गांव आकर बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतते ही जनता की सुध लेना भूल जाते हैं। 21वीं सदी के विकसित भारत में प्लास्टिक की कुर्सी पर बांधकर मरीजों को 7 किलोमीटर पैदल ले जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक है। कई बार अस्पताल पहुंचने में देरी के कारण मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
2027 से पहले सड़क नहीं तो उग्र आंदोलन
ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक संजय डोभाल और शासन से मांग की है कि नकोड़ा-कपोला गांव के लिए सड़क निर्माण कार्य तत्काल शुरू किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 2027 से पहले सड़क का कार्य धरातल पर शुरू नहीं हुआ, तो समस्त ग्रामीण एकजुट होकर बड़ा जुलूस निकालेंगे, धरना-प्रदर्शन करेंगे और सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन छेड़ने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
इस दौरान मौके पर प्रदीप राणा, रोहित, सतपाल, पवन, नवीन, विपिन, खुशपाल, विजयपाल राणा, दीपक, मनवीर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।



