बड़कोट: सरनौल के गडाल गांव की छानियों में भालू का आतंक, मवेशियों को बनाया निशाना; ग्रामीणों में खौफ

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
बड़कोट, uttarkashi: सीमांत क्षेत्र सरनौल के गडाल गांव स्थित छानियों में इन दिनों भालू के आतंक से ग्रामीण दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं। भालू के लगातार हो रहे हमलों में अब तक एक भैंस की जान जा चुकी है, जबकि करीब आधा दर्जन भेड़-बकरियां लापता हो गई हैं। खुलेआम दिन के उजाले में हो रही भालू की चहलकदमी से ग्रामीणों का अपने मवेशियों की देखरेख करना और खेतों की ओर जाना दूभर हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गडाल गांव के सौंसी कांडी तोक स्थित ग्रामीणों की छानियों में पिछले कई दिनों से एक खूंखार भालू डेरा जमाए हुए है। दो दिन पूर्व भालू ने वहां घास चुग रही ग्रामीण प्रवीन सिंह रावत की भैंस पर अचानक हमला करने का प्रयास किया। भालू के दौड़ाने पर जान बचाने के चक्कर में भयभीत भैंस अनियंत्रित होकर एक गहरी चट्टान में गिर गई, जिससे मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
भालू का उत्पात यहीं नहीं थमा; इसके तुरंत बाद उसने ग्रामीण टीका सिंह रावत की करीब आधा दर्जन भेड़-बकरियों को दौड़ा दिया, जो हमले के बाद से लापता हैं और उनके मारे जाने की आशंका जताई जा रही है।
दिन-दहाड़े छानियों में धमक रहा वन्यजीव
ग्रामीणों का कहना है कि आमतौर पर वन्यजीव रात के अंधेरे में आबादी की ओर आते हैं, लेकिन यह भालू बेखौफ होकर दिन-दहाड़े और दोपहर के समय छानियों के आसपास घूम रहा है। इस कारण पशुपालकों और किसानों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है। लोग जान-माल के भारी खतरे के चलते अपने डेरों में जाने से कतरा रहे हैं।
प्रशासन और वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार
घटना की सूचना ग्रामीणों द्वारा तुरंत वन विभाग को दी गई, जिसके बाद विभाग के कुछ कर्मचारी मौके पर मुआयना करने पहुंचे। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक भालू को पकड़ने या खदेड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
प्रभावित ग्रामीणों ने अब जिलाधिकारी से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि वन विभाग को अविलंब पिंजरा लगाने और भालू को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर ले जाने के सख्त निर्देश दिए जाएं, ताकि किसी भी बड़े मानवीय नुकसान से बचा जा सके।



