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पहाड़ों की रानी मसूरी में पहली बार दिखा मोर: जलवायु परिवर्तन या जैव विविधता का नया अध्याय? वन विशेषज्ञों के लिए बना शोध का विषय ​

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

मसूरी: प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मसूरी से एक ऐसी सुखद और हैरान करने वाली खबर आई है, जिसने पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी है। अमूमन मैदानी इलाकों, खेतों और घने जंगलों में दिखने वाला राष्ट्रीय पक्षी ‘मोर’ अब पहाड़ों की रानी मसूरी की हसीन वादियों में अपने पंख फैलाता हुआ नजर आया है।

अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और ठंडी आबोहवा के लिए दुनिया भर में मशहूर ‘पहाड़ों की रानी’ मसूरी से एक बेहद दिलचस्प खबर सामने आई है। मसूरी के आबादी क्षेत्र में पहली बार राष्ट्रीय पक्षी मोर देखा गया है, जिसने स्थानीय निवासियों से लेकर वन विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों तक सबको हैरत में डाल दिया है। अमूमन मैदानी इलाकों या कम ऊंचाई वाले गर्म क्षेत्रों में पाया जाने वाला यह खूबसूरत पक्षी इतनी ऊंचाई पर कैसे पहुंचा, यह अब चर्चा और शोध का बड़ा विषय बन गया है।

यह अनोखी घटना मसूरी के कैमल बैक रोड क्षेत्र की है। रविवार सुबह यहां के निवासियों ने अपने घरों के आसपास एक मोर को देखा। पहाड़ों में मोर की मौजूदगी इतनी अप्रत्याशित थी कि लोग अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पाए। देखते ही देखते इस खूबसूरत नजारे को लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों और वीडियो में कैद कर लिया। सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से वायरल हो रही है। स्थानीय लोगों के लिए यह एक बेहद उत्साहजनक और अनोखा अनुभव है।

मसूरी के जंगलों में अमूमन गुलदार, काकड़, जंगली सूअर और पहाड़ों में पाए जाने वाले वन्यजीव दिखाई देते हैं। स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक, मसूरी के इतिहास में आज से पहले कभी भी इस ऊंचाई पर मोर नहीं देखा गया।

इस घटना को लेकर पर्यावरणविदों और आम जनता में दो तरह की राय देखने को मिल रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन और पहाड़ों के बढ़ते तापमान का संकेत है। मैदानी इलाकों में बढ़ती गर्मी और पहाड़ों के गर्म होते वातावरण के कारण वन्यजीव अब ऊंचाई वाले इलाकों की तरफ रुख कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इसे मसूरी की समृद्ध होती जैव विविधता और जंगलों के सुधरते माहौल से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि अगर मोर यहां खुद को सुरक्षित और सहज महसूस कर रहा है, तो यह पर्यावरण के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत भी हो सकता है।

समुद्र तल से लगभग 2000 मीटर (6500 फीट) से अधिक की ऊंचाई पर मोर का मिलना वन वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए एक नई चुनौती है। यह घटना इस बात पर शोध करने के लिए मजबूर करती है कि क्या मोर पहाड़ों के इस ठंडे मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में खुद को ढाल रहे हैं? क्या आने वाले दिनों में पहाड़ों का पूरा इकोसिस्टम बदलने वाला है?

​बहरहाल, कारण चाहे जो भी हो, मसूरी की खूबसूरत वादियों में राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौजूदगी ने यहां के प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगा दिए हैं। प्रकृति प्रेमी इसे एक सुखद अहसास मान रहे हैं, तो वन विभाग अब इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या यह मोर रास्ता भटककर यहां आया है या पहाड़ों में मोरों का नया बसेरा शुरू होने जा रहा है।

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