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भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण: जनसेवा, राष्ट्रवाद और राष्ट्र निर्माण में पांच दशकों के योगदान को सर्वोच्च सम्मान

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

​नई दिल्ली / देहरादून: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित एक गरिमामयी नागरिक अलंकरण समारोह में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को जनसेवा के क्षेत्र में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्य भूषण’ से सम्मानित किया।

​एक प्रख्यात समाजसेवी, प्रखर शिक्षाविद्, निर्भीक पत्रकार और समर्पित राष्ट्रवादी नेता के रूप में भगत सिंह कोश्यारी का जीवन सार्वजनिक सेवा की एक अनूठी मिसाल है। यह सम्मान उनके द्वारा राष्ट्र निर्माण, विशेषकर उत्तराखंड के विकास और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में दिए गए अद्वितीय योगदान की एक बड़ी स्वीकृति है।

​1. एक नजर: भगत सिंह कोश्यारी का बहुआयामी सफर

​भगत सिंह कोश्यारी का सार्वजनिक जीवन सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा है। वे एक सजग समाज के निर्माण के लिए हमेशा जमीनी स्तर पर सक्रिय रहे। उनके सफर को इन प्रमुख पड़ावों से समझा जा सकता है:

• ​समर्पित राष्ट्रवादी और समाजसेवी: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा में लगा दिया। आपातकाल (1975-77) के दौरान उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया और तकरीबन दो साल जेल में बिताए।

• ​प्रख्यात शिक्षाविद्: राजनीति में आने से पहले वे एक शिक्षक थे। उन्होंने राजापुर (एटा) और उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में बच्चों को शिक्षित किया। वे हमेशा से ही शिक्षा को समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के उत्थान का माध्यम मानते रहे हैं।

• ​निर्भीक पत्रकार: उन्होंने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की समस्याओं और जनसरोकारों को आवाज देने के लिए साप्ताहिक पत्रिका ‘पर्वत पीयूष’ का संपादन और प्रकाशन किया। इस पत्रकारिता ने आगे चलकर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।

​2. उत्तराखंड के शिल्पकार और कुशल प्रशासक

​उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तरांचल) को अलग राज्य बनाने के आंदोलन में कोश्यारी अग्रिम पंक्ति के नेताओं में शामिल थे। जब साल 2000 में राज्य का गठन हुआ, तो उन्हें पहली सरकार में ऊर्जा, सिंचाई और कानून मंत्री की जिम्मेदारी दी गई।

​इसके बाद, साल 2001 से 2002 तक उन्होंने उत्तराखंड के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाली। उनके छोटे लेकिन प्रभावी कार्यकाल में उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे, विशेषकर ग्रामीण सड़कों और बिजली व्यवस्था को मजबूत करने की नींव रखी गई। वे उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे और अपनी बेबाक शैली से हमेशा जनता के मुद्दों को उठाते रहे।

​3. राष्ट्रीय राजनीति और महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में भूमिका

​संसदीय राजनीति में उनका कद बेहद ऊंचा रहा। वे राज्यसभा (2008-2014) और लोकसभा (2014-2019) दोनों सदनों के सदस्य रहे। संसद की कई महत्वपूर्ण समितियों, विशेषकर ‘वन रैंक वन पेंशन’ की सिफारिश करने वाली समिति के अध्यक्ष के रूप में उनके काम को आज भी याद किया जाता है।

​साल 2019 में उन्हें देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक, महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। वहां अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई राजनीतिक और संवैधानिक चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया। साथ ही, उन्होंने महाराष्ट्र के उच्च शिक्षा ढांचे और विश्वविद्यालयों में सुधार के लिए कई प्रशंसनीय कदम उठाए।

​अपनी सादगी, खादी धोती-कुर्ता और पहाड़ी टोपी के लिए पहचाने जाने वाले 80 से अधिक वर्ष के हो चुके भगत सिंह कोश्यारी आज भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। वे नई पीढ़ी के राजनेताओं और समाजसेवियों के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं।

 

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