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जैनी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हरक सिंह रावत का पलटवार: बोले ‘सीबीआई दे चुकी है क्लीन चिट, बौखलाई भाजपा कर रही है षड्यंत्र’

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

​देहरादून: जैनी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर पुराना विवाद गरमा गया है। इस पूरे मामले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत का तीखा बयान सामने आया है। उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की राजनीतिक बौखलाहट करार दिया है।

​’भाजपा बैकफुट पर, ध्यान भटकाने की साजिश’

​हरक सिंह रावत ने कहा कि राज्य में भाजपा सरकार पूरी तरह बैकफुट पर आ चुकी है। कांग्रेस की रैलियों में उमड़ रही भीड़, अंकिता भंडारी हत्याकांड के न्याय की लड़ाई, पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में कांग्रेस आक्रामक है। इसी दबाव से ध्यान भटकाने के लिए 20-25 साल पुराने बंद हो चुके मामले को फिर से तूल दिया जा रहा है, क्योंकि भाजपा को उत्तराखंड में अपनी विदाई साफ नजर आ रही है।

​पुराने आरोपों पर दी सफाई: ‘सीबीआई जांच में साबित हुई थी बेगुनाही’

​मामले की पृष्ठभूमि पर बात करते हुए हरक सिंह रावत ने कहा कि उस समय उन पर दिल्ली के सम्राट होटल में मौजूद रहने के झूठे आरोप लगाए गए थे। उन्होंने बताया कि जिस अवधि का आरोप लगाया गया था, वे सितंबर से दिसंबर तक दिल्ली गए ही नहीं थे। सीबीआई ने उनकी कॉल डिटेल, ड्राइवर, गनर और वाहन की लॉग बुक से लेकर पुलिस वायरलेस रिकॉर्ड्स तक की विस्तृत जांच की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस दिन की घटना बताई गई, उस दिन वे अपने पैतृक गांव में आयोजित ‘पांडव नृत्य’ में शामिल थे, जिसकी पुष्टि प्रशासनिक और पुलिस रिकॉर्ड से हुई थी और सभी आवश्यक वैज्ञानिक परीक्षणों और डीएनए जांच के बाद सीबीआई तथा संबंधित न्यायालय द्वारा उन्हें पूरी तरह क्लीन चिट दी गई थी।

​भाजपा पर दागे तीखे सवाल

​हरक सिंह रावत ने भाजपा नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि”यदि मैं गलत था, तो 2016 में भाजपा ने मुझे अपनी पार्टी में शामिल क्यों किया? भाजपा ने मुझे अपनी सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद क्यों सौंपा?”

​उन्होंने यह भी कहा कि किसी मामले में जांच एजेंसी और अदालत से फैसला आने के बाद कानूनन अपील की एक तय समय-सीमा होती है। 20-25 साल बाद राजनीतिक बदले की भावना से पुराने मामलों को फिर से उछालना कानूनी और नैतिक रूप से पूरी तरह गलत है।

​‘न मुझे नुकसान होगा, न कांग्रेस को’

​राजनीतिक नुकसान के सवाल पर हरक सिंह रावत ने कहा कि इस प्रकरण से उन्हें या कांग्रेस पार्टी को कोई नुकसान नहीं होने वाला, बल्कि इससे पार्टी को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने 2007 के विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए याद दिलाया कि 2003-04 के इस विवाद के बाद भी जनता ने उन पर भरोसा जताया था और वे लैंसडाउन से पहले (1700 वोट) के मुकाबले रिकॉर्ड 5500 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे और नेता प्रतिपक्ष बने थे।

​उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी जांच या दबाव की राजनीति से डरने वाले नहीं हैं और जनता भाजपा के इस राजनीतिक हथकंडे को भली-भांति समझती है।

 

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