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शिक्षक, साधक और समाज-सेवक: पुरोला के सुदूर स्कूल में शिक्षा की अलख जगा रहे ‘डॉ.’ पूरण लाल सरियाल

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

पुरोला uttarkashi : पहाड़ की कंदराओं और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जब कोई शिक्षक अपने दायित्व को सिर्फ नौकरी न मानकर जीवन का मिशन बना लेता है, तो वह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन जाता है। उत्तरकाशी जनपद के पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कामरा में तैनात प्रधानाध्यापक पूरण लाल सरियाल एक ऐसे ही विरले व्यक्तित्व हैं। पिछले 19 वर्षों से इस दुर्गम क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने वाले सरियाल न केवल एक कुशल शिक्षक हैं, बल्कि वे एक प्रखर साहित्यकार, सुरीले गायक और एक संवेदनशील समाजसेवक भी हैं।

पूरण लाल सरियाल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद मजबूत रही है। हिंदी साहित्य में एम.ए., बी.एड और विशिष्ट बी.टी.सी. की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने 13 अप्रैल 2007 को बतौर शिक्षक अपनी सेवा शुरू की थी। राजकीय प्राथमिक विद्यालय कामरा से शुरू हुआ सफर आज राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कामरा में ही प्रधानाध्यापक के रूप में अविरल जारी है। वे शिक्षा विभाग में 6 वर्षों तक मास्टर ट्रेनर (MT) और सुगमकर्ता की महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।उत्तराखंड राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ पुरोला इकाई में वे वर्ष 2021-24 के दौरान निर्विरोध कोषाध्यक्ष चुने गए। वर्तमान में वे संगठन की जिला कार्यकारिणी में प्रचार मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कोविड कालखंड में भी उनकी उत्कृष्ट और समर्पित सेवाओं के लिए उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया था।

कलम और कंठ के धनी: साहित्य व लोक-गायन में अमिट छाप

सरियाल का मन जितना बच्चों को पढ़ाने में रमता है, उतना ही वे मां सरस्वती की साधना कलम और कंठ से भी करते हैं। साहित्य के क्षेत्र में सरियाल अब तक दो बेहतरीन काव्य संग्रह प्रकाशित कर चुके हैं जिसमें मेरा काव्य साहित्य कवितांजलि – 1 (वर्ष 2020) एवं मेरा काव्य साहित्य कवितांजलि – 2 (वर्ष 2025) शामिल है।

वर्तमान में उनकी तीसरी पुस्तक ” रवांई का इतिहास” का लेखन कार्य भी गतिमान है। लेखन के साथ-साथ लोक-संस्कृति और गायन के प्रति उनका गहरा लगाव है। देवभूमि की अनमोल विरासत को सहेजते हुए वे प्रसिद्ध धार्मिक और लोक आख्यानों पर आधारित ‘जागमाता खलाड़ी’ और ‘महासू महाराज’ की वंदना को अपनी सुरीली आवाज दे चुके हैं।

मेधावियों के मददगार: अपनी जेब से करते हैं गरीब बच्चों की आर्थिक सहायता

पूरण लाल सरियाल की पहचान केवल एक शिक्षक या कलाकार तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका दिल एक सच्चे समाजसेवक का भी है। वे अपने विद्यालय और क्षेत्र के गरीब व मेधावी बच्चों की पढ़ाई में कभी गरीबी को आड़े नहीं आने देते। सरियाल ऐसे जरूरतमंद बच्चों की अपनी निजी आय से आर्थिक सहायता भी करते हैं, ताकि पहाड़ की प्रतिभाएं आगे बढ़ सकें और देश का नाम रोशन कर सकें।

मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी’ से मानद उपाधि

पूरण लाल सरियाल को गत 13 जून 2026 को फरीदाबाद हरियाणा में आयोजित एक भव्य समारोह में ‘मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी’ द्वारा डॉक्टरेट (Ph.D. / D.Litt.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मान के लिए देशभर के 18 राज्यों से 55 उत्कृष्ट प्रतिभाओं को चुना गया था, जिसमें उत्तराखंड से सरियाल ने अपनी जगह बनाई।

‘गुरु’ की पुरातन और पवित्र परिभाषा को चरितार्थ करते डॉ. पूरण लाल सरियाल जैसे व्यक्तित्व समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनका यह सफर दिखाता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो पहाड़ के सबसे दूरदराज के कोने में बैठकर भी पूरे देश में अपनी चमक बिखेरी जा सकती है।

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