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शहीद के नाम की सड़क पर ‘सिस्टम’ का रोड़ा: टेंडर के बाद भी नहीं बदला भाग्य, सेब सीजन से पहले ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

मोरीuttarkashi: कारगिल शहीद दिनेश रावत के नाम पर बने ‘गमरी-मैंजनी-किरोली’ मोटर मार्ग की बदहाली को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। लंबे इंतजार और जैसे-तैसे कर यह सड़क बनकर तैयार तो हुई, लेकिन आज तक इस पर डामरीकरण नहीं हो सका। अब हालत यह है कि आगामी सेब सीजन और मानसून सिर पर है, लेकिन पीएमजीएसवाई और ठेकेदार की सुस्ती के कारण इस मार्ग पर डामरीकरण का काम अधर में लटका हुआ है, जिससे आधा दर्जन गांवों के ग्रामीणों और बागवानों में भारी आक्रोश है।

आपको बताते चलें कि इस सड़क पर डामरीकरण की मांग को लेकर क्षेत्र की जनता ने पूर्व में शहीद दिनेश रावत के स्मारक पर लंबा धरना-प्रदर्शन और आंदोलन भी किया था। यह मोटर मार्ग क्षेत्र के भुटाणू, मैंजनी, किरोली और पावली समेत कई गांवों की लाइफलाइन है। इस पूरे बेल्ट से हर साल करीब 30 हजार पेटी सेब देश की विभिन्न मंडियों तक पहुंचता है, जो यहां के काश्तकारों की आजीविका का मुख्य जरिया है। पिछले साल भी सड़क के उबड़-खाबड़ होने और भारी टूट-फूट के कारण बागवानों की सेब की फसल मंडियों तक पहुंचने से पहले ही खराब हो गई थी, जिससे उन्हें लाखों का नुकसान झेलना पड़ा था।

ग्रामीणों की लगातार मांग के बाद आखिरकार पीएमजीएसवाई द्वारा फरवरी 2026 में इस मार्ग के डामरीकरण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई। मैंजनी के ग्राम प्रधान बलवीर सिंह रावत ने बताया कि बकायदा एक ठेकेदार के नाम टेंडर भी स्वीकृत हो चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि टेंडर होने के महीनों बाद भी आज तक मौके पर काम शुरू नहीं हो सका है। जब ग्रामीण इस संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगते हैं, तो विभाग की ओर से एक ही रटा-रटाया तर्क दिया जाता है कि ‘किन्हीं तकनीकी कारणों से ठेकेदार का बॉन्ड नहीं हो पा रहा है।’ अधिकारियों का यह ढुलमुल रवैया और बॉन्ड न होने का बहाना ग्रामीणों की समझ से परे है।

अब जून का महीना शुरू हो चुका है और जल्द ही उत्तराखंड में भारी मानसूनी बरसात का दौर शुरू होने वाला है। इसके तुरंत बाद क्षेत्र का मुख्य सेब सीजन भी शुरू हो जाएगा। ऐसे में यदि समय रहते सड़क पर डामरीकरण या सुधारीकरण का कार्य शुरू नहीं हुआ, तो बरसात में यह कच्ची और उबड़-खाबड़ सड़क पूरी तरह से मलबे और कीचड़ में तब्दील हो जाएगी, जिससे हजारों पेटियां सेब गांवों में ही सड़ने को मजबूर हो जाएगा। यदि जल्द से जल्द विभागीय अड़चनों को दूर कर धरातल पर डामरीकरण का कार्य प्रारंभ नहीं किया गया, तो क्षेत्र की आक्रोशित जनता एक बार फिर उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी: बलवीर सिंह रावत ग्राम प्रधान मैंजनी।

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