आंदोलनउत्तरकाशीउत्तराखंडपुल निर्माण की मांग

तलड़ा में पुल निर्माण की मांग को लेकर कमल नदी के बीचोंबीच पत्थर में बैठकर सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश डबराल ने शुरू किया सत्याग्रह : अधिकारी पहुंचे मौके पर

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

पुरोला,uttarkashi: पुरोला विधानसभा के सुनार छानी के पास कमल नदी पर पुल न होने से तलड़ा गांव के ग्रामीण पिछले कई वर्षों से अपनी जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं। पूर्व में बना पुल बाढ़ की चपेट में आकर बह गया था, जिसके बाद से लगातार मांग किए जाने के बावजूद अब तक शासन-प्रशासन द्वारा नए पुल का निर्माण नहीं कराया गया।

​हाल ही में ग्रामीणों द्वारा आवागमन हेतु बल्लियाँ डालकर बनाई गई अस्थाई व्यवस्था भी नदी के तेज बहाव में बह गई, जिससे क्षेत्र का संपर्क पूरी तरह कट गया और नगदी फसल टमाटर आदि को बाजार तक पहुँचाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

नदी के बीच बैठकर धरने पर बैठे प्रकाश डबराल

ग्रामीणों की इस उपेक्षा से व्यथित होकर सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश डबराल ने कमल नदी के बीचों-बीच स्थित पत्थर पर बैठकर भूख हड़ताल और सत्याग्रह शुरू कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने शीघ्र ही पुल निर्माण का ठोस निर्णय नहीं लिया, तो वे नदी के बहते जल में उतरकर जल सत्याग्रह करेंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

क्षेत्र में उफनती नदी पर पुल निर्माण और स्थायी/वैकल्पिक व्यवस्था न होने को लेकर स्थानीय निवासियों में गहरा रोष व्याप्त है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश डबराल ने नदी तट से ग्राउंड रिपोर्ट देते हुए भी शासन-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

​प्रकाश डबराल ने कहा कि विगत कई वर्षों से (लगभग 5 साल) क्षेत्रवासी नदी पार करने के लिए स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी और प्रशासन हर साल केवल आश्वासन देकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। पुल न होने के कारण ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। नदी के तेज बहाव के चलते लोगों का जीवन-यापन और आवाजाही अत्यंत जोखिमभरी हो गई है।

डीएम से वार्ता और बैली ब्रिज की मांग

मौके पर पहुंचे लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों, पुलिस प्रशासन और विभागीय टीमों के समक्ष प्रकाश डबराल ने स्पष्ट किया कि अब केवल खोखले आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। उन्होंने जिलाधिकारी (उत्तरकाशी) प्रशांत आर्य से दूरभाष पर वार्ता कर उन्हें तत्काल धरातल पर पहुंचकर ग्रामीणों की स्थिति देखने का आग्रह किया। प्रकाश डबराल ने मांग रखी कि आपदा प्रबंधन कोष से तुरंत बजट जारी कर आपातकालीन व्यवस्था के तौर पर लोहे का वैली ब्रिज (Baily Bridge) स्थापित किया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

कल सुबह 7 बजे से चक्का जाम का ऐलान

प्रकाश डबराल ने चेतावनी दी है कि जब तक जिलाधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थायी व वैकल्पिक पुल निर्माण की स्वीकृति प्रदान नहीं करते, तब तक वह और स्थानीय ग्रामीण धरना स्थल से नहीं हटेंगे। उन्होंने ऐलान किया है कि यदि प्रशासन की ओर से त्वरित कार्रवाई नहीं होती है, तो कल सुबह 7:00 बजे से चक्का जाम किया जाएगा।

​उन्होंने स्थानीय वाहन चालकों, व्यापार मंडलों और आम जनता से इस आंदोलन में सहयोग देने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि चक्का जाम से उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति और अव्यवस्था की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

5 वर्षों से पुल का इंतजार, हर साल रद्दी में जाती है DPR

स्थानीय ग्रामीण पिछले 5 वर्षों से नदी पर एक अदद पुल के निर्माण का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल अधिकारियों द्वारा डीपीआर बनाई जाती है, लेकिन बाद में उसे खारिज कर दिया जाता है, जिससे निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।

अधिकारियों और नेताओं को दी चेतावनी

स्थानीय ग्रामीण ने प्रशासनिक उदासीनता पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा:

• ​अधिकारियों पर निशाना: अधिकारी एसी कमरों में बैठकर बजट का मजा ले रहे हैं, जबकि आम जनता, महिलाओं और बच्चों को उफनती नदी पार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

​नेताओं से इस्तीफे की मांग: यदि जनप्रतिनिधी और अधिकारी एक पुल का निर्माण नहीं करा सकते, तो उन्हें अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।

​ग्रामीणों का रोष: ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो गांव में आने वाले नेताओं और अधिकारियों का कड़ा विरोध किया जाएगा।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button