
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में आगामी महाकुंभ-2027 के अवसर पर गंगा तटों को पर्यावरण के अनुकूल एक नया और भव्य रूप देने की तैयारी शुरू हो गई है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और नीदरलैंड के तकनीकी सहयोग से हरिद्वार के गंगा घाटों को प्राकृतिक आवरण से सुसज्जित ‘ग्रीन घाट’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए शुक्रवार को नीदरलैंड के अंतरराष्ट्रीय जल विशेषज्ञों के एक उच्चस्तरीय दल ने हरिद्वार पहुंचकर प्रस्तावित ग्रीन घाट क्षेत्र और आस्था पथ का स्थलीय निरीक्षण किया।
धनुष पुल से बैरागी कैंप तक सजेगा आस्था पथ
कुंभ मेला-2027 के तहत अवस्थापना सुविधाओं को बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत हरकी पैड़ी को जोड़ने वाले प्रसिद्ध धनुष पुल से बैरागी कैंप तक आस्था पथ का विस्तार किया जाएगा। इस पूरे मार्ग से जुड़े गंगा घाटों को ‘ग्रीन घाट’ मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिससे पूरा क्षेत्र स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल दिखेगा। हरित आवरण बढ़ने से श्रद्धालुओं के आवागमन का मार्ग अधिक सुगम, शीतल और मनोहारी बनेगा।
भारत-नीदरलैंड साझेदारी से तकनीक का समन्वय
यह महत्वाकांक्षी पहल भारत और नीदरलैंड के संयुक्त ‘शहरी नदी प्रबंधन कार्यक्रम’ का हिस्सा है। नीदरलैंड के प्रतिनिधिमंडल ने स्थलीय मुआयना करने के बाद मेला नियंत्रण भवन में मेलाधिकारी सोनिका और नगर आयुक्त नंदन कुमार के साथ बैठक की।
निरीक्षण दल में नीदरलैंड दूतावास के जल प्रतिनिधि मॉरित्स बोसमैन, नीदरलैंड के जल प्रबंधन मंत्रालय के कार्यक्रम प्रबंधक सेन्डर कारपेज तथा एनएमसीजी की ओर से जय दिघे व पंकज रावत शामिल थे।
मेलाधिकारी सोनिका ने बताया कि कुंभ 2027 की सभी तैयारियों में गंगा तटों की स्वच्छता और इको-फ्रेंडली विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं, नगर आयुक्त नंदन कुमार ने विशेषज्ञों के साथ परियोजना के व्यावहारिक एवं तकनीकी पहलुओं पर रूपरेखा साझा की।



