यमुनोत्री में JCB की बकेट के सहारे उफनता गदेरा पार करने को मजबूर ग्रामीण, मुख्यमन्त्री के निरीक्षण के एक साल बाद भी गड़गाड़ पुल अधूरा

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
यमुनोत्री, uttarkashi: पहाड़ों में दावों और धरातल की हकीकत के बीच का फासला कितना खतरनाक हो सकता है, इसकी बानगी यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र के नौगांव ब्लॉक में देखने को मिल रही है।आपदा के एक साल बीत जाने और खुद सूबे के मुख्यमंत्री व स्थानीय विधायक के स्थलीय निरीक्षण के बावजूद कुपड़ा-कुंशाला-त्रिखीली मोटर मार्ग पर गड़गाड़ में निर्माणाधीन मोटर पुल का निर्माण आज तक पूरा नहीं हो सका है। नतीजतन, ग्रामीणों को उफनते नाले और मलबे को पार करने के लिए जेसीबी मशीन की बकेट में बैठकर अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
JCB बनी जीवनरेखा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
सोशल मीडिया पर सामने आ रही तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि तेज बहाव वाले गड़गाड़ नाले को पार करने के लिए ग्रामीण जान हथेली पर रखकर जेसीबी के बकेट का सहारा ले रहे हैं। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए रोज़मर्रा की आवाजाही एक खौफनाक चुनौती बन चुकी है।
जनप्रतिनिधियों और कार्यदायी संस्था की लापरवाही पर फूटा गुस्सा
स्थानीय निवासी महावीर पंवार ‘माही’ ने शासन-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के बाद भी नतीजा सिफर, पिछले वर्ष आई आपदा और झील बनने के बाद मुख्यमंत्री और क्षेत्रीय विधायक ने स्वयं क्षेत्र का दौरा किया था, मगर एक साल बीत जाने पर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सड़क और पुल दोनों बदहाल है, न तो मोटर मार्ग को सुधारा गया और न ही निर्माणाधीन पुल को समय पर तैयार किया गया। कार्यदायी संस्था और विभाग की घोर लापरवाही के खिलाफ उन्होंने मांग की है कि कुपड़ा, कुंशाला और त्रिखीली तीनों गांवों की सुरक्षा व सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस पुल का निर्माण युद्धस्तर पर पूरा कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते सुध नहीं ली, तो क्षेत्र में कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है।



