दैवीय आपदा से तबाह फसलों के मुआवजे और ‘फार्मर आईडी’ की बाध्यता हटाने की मांग, किसानों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
पुरोला,uttarkashi: रवांई घाटी के पुरोला, नौगांव और मोरी में हाल ही में हुई भीषण अतिवृष्टि, भूस्खलन और ओलावृष्टि से तबाह हुई नकदी फसलों का किसानों ने उचित मुआवजा देने की मांग की है।
सोमवार को इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश डबराल के नेतृत्व में किसानों ने पुरोला तहसील परिसर में एकत्र होकर उपजिलाधिकारी के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव, उत्तराखंड सरकार को एक ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में कहा गया है कि भारी बारिश के बाद आए मलबे और बाढ़ के कारण टमाटर, शिमला मिर्च, नाशपाती और मुख्य खाद्य फसल धान के खेत पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। इस आपदा से प्रभावित काश्तकारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
फार्मर आईडी’ की बाध्यता से बढ़ रही परेशानी
किसानों का कहना है कि सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और सर्वर की लगातार समस्या बनी रहती है। आपदा के चलते संचार व्यवस्था भी ठप पड़ी है, जिससे लगभग 80 प्रतिशत किसान अपनी किसान पहचान संख्या (Farmer ID) पोर्टल पर दर्ज या अपडेट कराने में असमर्थ हैं। ऐसे में सरकारी योजनाओं और राहत राशि के लिए फार्मर आईडी की अनिवार्यता के कारण प्रभावित काश्तकार मुआवजा पाने से वंचित हो रहे हैं।
किसानों की मुख्य मांगें:
तत्काल स्थलीय निरीक्षण : राजस्व, कृषि और उद्यान विभाग की संयुक्त टीम बनाकर प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का तुरंत आकलन कराया जाए।
• मानकों के तहत राहत: आपदा प्रभावित किसानों को राज्य आपदा राहत कोष के तहत अविलंब उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
• Farmer ID नियम में ढील: आपदा की असाधारण स्थिति को देखते हुए फार्मर आईडी की बाध्यता में तत्काल राहत दी जाए ताकि प्रक्रिया में तेजी आए।
• ऋण की किस्तें स्थगित एवं ब्याज माफी: प्रभावित किसानों के कृषि ऋणों (KCC) की किस्तों को स्थगित किया जाए, ब्याज माफ करने पर विचार हो तथा आगामी सीजन के लिए नि:शुल्क बीज व खाद उपलब्ध कराया जाए।
काश्तकारों ने सरकार से गुहार लगाई है कि अन्नदाताओं के इस संकट को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक जटिलताओं को दूर किया जाए और प्रभावितों के लिए शीघ्र राहत पैकेज जारी किया जाए।



