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वाहवाही लूटते माननीयों को ग्रामीणों ने दिखाया ‘आईना’: बदहाल सड़क पर किया ‘गड्ढा पूजन’, सेब सीजन सिर पर, बागवान परेशान

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 
मोरी,uttarkashi; एक तरफ जहां पुरोला विधानसभा में केंद्र से स्वीकृत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यों का शिलान्यास और भूमिपूजन कर सोशल नेटवर्किंग पर जमकर वाहवाही बटोरी जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ धरातल की कड़वी हकीकत बयां करती एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने शासन और प्रशासन के दावों की पोल खोल कर रख दी है। मोरी ब्लॉक के सिंगतूर पट्टी के ग्रामीणों ने बदहाल सड़क के ‘गड्ढों का पूजन’ कर सरकार और विभाग को कड़ा संदेश दिया है।

​लोक निर्माण विभाग द्वारा वर्ष 2008 में निर्मित ‘देवरा, गैच्ववाड़ गांव, दड़गाण गांव, हल्टाड़ी मोटर मार्ग’ (15 किमी) आज पूरी तरह खस्ताहाल है। वर्तमान में यह सड़क पीएमजीएसवाई के अधीन है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर हुआ डामरीकरण पूरी तरह से उखड़ गया है और आज इस पूरी सड़क पर कदम-कदम पर गहरे गहरे जानलेवा गड्ढे बने हुए हैं, जो रोज हादसों को दावत दे रहे हैं।
​विभाग अपनी नाकामी छिपाने के लिए कभी-कभार इन गड्ढों में मिट्टी भर देता है, जो बरसात आते ही और भी जानलेवा दलदल में तब्दील हो जाती है।
क्षेत्र में सेब का सीजन शुरू होने वाला है। इस मोटर मार्ग से सिंगतूर पट्टी के गैच्ववाड़ गांव, देवरा, सुंच्चाण गांव, हल्टाड़ी, दड़गाण गांव, गुराड़ी, पैंसर, पासा, पोखरी, कुनारा, लुदराला और कामड़ा
आदि गांवों का सेब मंडियों में भेजा जाता है।
“इस पूरे क्षेत्र में हर साल करीब एक लाख पेटी सेब का उत्पादन होता है। लेकिन सड़क की ये बदहाली देखकर बागवानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। उन्हें डर है कि अगर गड्ढों के कारण सेब समय पर मंडी नहीं पहुंचा, तो उनकी सालभर की कमाई बर्बाद हो जाएगी।”

​ग्रामीणों का कहना है कि वे इस मोटर मार्ग के पुन: डामरीकरण की मांग को लेकर कई बार गुहार लगा चुके हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि सोशल मीडिया पर भूमिपूजन की तस्वीरें पोस्ट करने वाले जनप्रतिनिधियों से लेकर विभागीय अधिकारियों तक, कोई भी इनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। थक-हारकर आज क्षेत्र के बागवानों और ग्रामीणों ने सड़क के बीचों-बीच बैठकर बाकायदा ‘गड्ढा पूजन’ किया और इस अनोखे प्रदर्शन के जरिए सोए हुए सिस्टम को जगाने की कोशिश की। अब देखना यह होगा कि फेसबुक पर विकास की गंगा बहाने वाले माननीय और सुस्त पड़ा विभाग इस ‘गड्ढा पूजन’ के बाद जागता है या फिर इन किसानों को भगवान भरोसे ही छोड़ दिया जाता है।

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