चारधाम यात्रा 2026: श्रद्धालुओं के स्वागत को तैयार गंगोत्री धाम, जिलाधिकारी ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
Uttarkashi: आगामी 19 अप्रैल से शुरू हो रही विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर देवभूमि में उत्साह चरम पर है। यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित बनाने के लिए उत्तरकाशी जिला प्रशासन पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में नजर आ रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने गंगोत्री धाम का स्थलीय निरीक्षण कर अंतिम तैयारियों को परखा।
सुरक्षा और तकनीक पर विशेष जोर
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। धाम परिसर में निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
• 24×7 निगरानी: सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे परिसर की मॉनिटरिंग की जाएगी।
• सक्रिय कंट्रोल रूम: किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे चालू रहेगा।
• पब्लिक एड्रेस सिस्टम: यात्रियों को समय-समय पर जरूरी सूचनाएं और दिशा-निर्देश देने के लिए उद्घोषणा प्रणाली को नियमित रूप से संचालित किया जाएगा।
सुविधाजनक दर्शन और भीड़ प्रबंधन
श्रद्धालुओं को सुलभ दर्शन हो सकें, इसके लिए जिलाधिकारी ने मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ समन्वय बैठक की। आरती और पूजा-अर्चना के समय को इस तरह व्यवस्थित किया गया है जिससे अनावश्यक भीड़ एकत्र न हो। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि कतार प्रबंधन और दर्शन की व्यवस्था ऐसी हो कि हर भक्त को गरिमामय अनुभव प्राप्त हो।
बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सीमा सड़क संगठन (BRO) और अन्य कार्यदायी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे सड़क मरम्मत कार्यों की प्रगति भी देखी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि:
• पेयजल एवं स्वच्छता: धाम परिसर में स्वच्छ जल की आपूर्ति और उच्च स्तरीय साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।
• स्वास्थ्य सेवाएं: यात्रा मार्ग और धाम में मेडिकल कैंप और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं मुस्तैद रहें।
• समन्वय: सभी विभाग आपसी तालमेल से काम करें ताकि व्यवस्थाओं में कोई कमी न रहे।
”प्रशासन का मुख्य उद्देश्य देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को एक सहज, सुखद और सुरक्षित यात्रा प्रदान करना है। देवभूमि की मर्यादा के अनुरूप हम बुनियादी ढांचे और यातायात प्रबंधन को चाक-चौबंद करने के लिए समर्पित भाव से जुटे हैं।” — प्रशांत आर्य, जिलाधिकारी उत्तरकाशी



