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​कलियुग के ‘श्रवण कुमार’: मां को कंधे पर उठा कर निकले केदारनाथ की कठिन डगर पर

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

​पुरोलाuttarkashi : जहाँ आज के आधुनिक युग में भागदौड़ भरी जिंदगी और आपसी रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं, वहीं सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने ‘मातृ सेवा’ की ऐसी मिसाल पेश की है जिसे देख हर किसी की आँखें नम हो गई हैं। यह कहानी उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के रहने वाले धीरज की है, जो अपनी बुजुर्ग मां को कंधे पर उठाकर बाबा केदार के दर्शन कराने पैदल निकल पड़े हैं।

​1800 किलोमीटर का सफर और अटूट श्रद्धा

​धीरज ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश के बदायूं से अपनी यात्रा शुरू कर चुके हैं और अब तक लगभग 1800 किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं। इस लंबी दूरी को तय करने में उन्हें 3 महीने और 24 दिन का समय लगा है। धीरज और उनके साथी एक बाँस की बनी पालकी (कांवड़ की तरह) के जरिए अपनी मां को कंधे पर ढो रहे हैं।

​केदारनाथ की यात्रा अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चढ़ाई के लिए जानी जाती है। ऐसे में धीरज का यह कदम न केवल उनकी शारीरिक शक्ति बल्कि उनके अटूट विश्वास और धैर्य को भी दर्शाता है। रास्ते में मिलने वाले श्रद्धालु उनकी इस भक्ति को देख ‘जय श्री केदार’ के जयकारे लगा रहे हैं और उनकी सहायता के लिए आगे आ रहे हैं।

​केदारनाथ धाम की यात्रा आस्था और धैर्य की परीक्षा है। धीरज जैसे भक्तों की यह कहानी हमें सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मकता बनाए रखें,यात्रा के दौरान एक-दूसरे की मदद करें और धैर्य न खोएं,ऐसे प्रेरक वीडियो साझा करें ताकि अन्य लोग भी धर्म और सेवा के मार्ग पर चलने के लिए उत्साहित हों।

कहते हैं कि अगर श्रद्धा और आस्था सच्ची हो, तो महादेव स्वयं रास्ता सुगम कर देते हैं। धीरज की यह ‘कांवड़ यात्रा’ केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि मानवता और रिश्तों की गरिमा को पुनर्जीवित करने वाला एक महान संदेश है।

“आजकल लोग अपने माता-पिता को वृद्धाश्रम छोड़ देते हैं या उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। मैं समाज और नई पीढ़ी को यह संदेश देना चाहता हूँ कि माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। मैं अपनी मां के दूध का कर्ज तो नहीं उतार सकता, लेकिन 1% भी कोशिश कर सकूं तो मेरा जीवन धन्य है “धीरज

 

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