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जागमाता के जयकारों से गुंजायमान हुआ खलाड़ी : पांच दिवसीय महाअनुष्ठान का भव्य समापन

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

​पुरोलाUTTARKASHI: देवभूमि उत्तराखंड की अटूट आस्था और प्राचीन परंपराओं का संगम एक बार फिर रवांई घाटी में देखने को मिला। पुरोला विकासखंड के ऐतिहासिक खलाड़ी गांव में आयोजित जागमाता की पांच दिवसीय विशेष पूजा और महा अनुष्ठान सोमवार को पूर्ण विधि-विधान और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया।

​हजारों की संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरी घाटी गुंजायमान रही। इस पावन अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।

​समुद्र तल से 1772 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खलाड़ी गांव का यह शक्तिपीठ न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह स्थल 15वीं शताब्दी से भी पूर्व का माना जाता है। शक्तिपीठ के समीप आज भी नेपाल के मल्ल वंश शासन काल के 15वीं शताब्दी के सिक्के रोपित हैं, जो इस स्थान की प्राचीनता और ऐतिहासिक प्रभाव को प्रमाणित करते हैं।

​जागमाता की इस विशेष पूजा की सबसे बड़ी विशेषता इसका सांस्कृतिक विस्तार है, यहां अनुष्ठान का संपादन हिमाचल प्रदेश (तहसील चौपाल, जिला शिमला) की ग्राम पंचायत मनौती के पांडे ब्राह्मणों द्वारा किया जाता है। पूजा में शिकारू नाग महाराज की डोली के साथ-साथ चंद्रेश्वर और महेश्वर देवता भी विराजमान रहते है।

​हर पांच वर्ष में आयोजित होने वाले इस महाकुंभ में 23 अप्रैल से पूजा शुरू हुई थी। इस दौरान माता के साथ ‘जोगड़िया’, ‘आछरी’, ‘मांतरी’ और ‘परियों’ की विशेष पूजा की गई। साथ ही गांव के प्रवेश द्वारों और घाटों को पूजने की प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया गया।

इस शक्तिपीठ के बारे में कहा जाता है कि यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। रवांई, जौनपुर, जौनसार और पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश से हजारों श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर यहां पहुंचते हैं।

इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान के आयोजक सोबत सिंह रावत, बुद्धि सिंह रावत, धनवीर सिंह रावत, बिशन सिंह रावत, महिपाल सिंह रावत, फकीर चंद रावत, यशवंत सिंह, राजेश सिंह, श्रवण सिंह, त्रेपन सिंह,जयदेव सिंह, राजमोहन सिंह, जगमोहन सिंह, दिनेश सिंह, मनमोहन सिंह, विपिन रावत और कविंद्र, सुभाष रावत सहित समस्त ग्रामीणों ने यहां उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष पुरोला बिहारी लाल शाह, पूर्व विधायक मालचंद, प्रसिद्ध लोक गायक अनिल बेसारी सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण मौजूद थे।

लोक मान्यताओं के अनुसार जागमाता चार बहनें हैं, जिनके शक्तिपीठ छजाण (चकराता), थंगाण (हिमाचल), बामसू (मोरी) और खलाड़ी (पुरोला) में स्थित हैं। ये सभी सिरमौर (हिमाचल) से यहां आई थीं ,पूरन सरियाल इतिहासकार

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