पशुपालकों के लिए वरदान बनी सरकार की ‘1962 मोबाइल वेटरिनरी सेवा’, मात्र 42 महीनों में 5 लाख से अधिक पशुओं का हुआ मुफ़्त इलाज

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
देहरादून। उत्तराखंड के दूरस्थ और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालकों के लिए 1962 मोबाइल वेटरिनरी यूनिट’ (MVU संजीवनी साबित हो रही है। सूबे के पशुपालन विभाग द्वारा संचालित ‘1962 मोबाइल वेटरिनरी यूनिट’ परियोजना ने राज्य में सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। महज़ 42 महीनों के अल्प समय में इस सेवा के ज़रिए राज्य के 5 लाख से अधिक बेज़ुबान पशुओं को उनके घर-द्वार पर ही त्वरित और उच्च गुणवत्तापूर्ण इलाज मुहैया कराया जा चुका है।
आपको बताते चलें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 16 नवंबर 2022 को इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारम्भ किया था, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालकों को पशु चिकित्सालयों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाना और उनके द्वार पर ही पशु स्वास्थ्य सेवाएँ पहुंचाना था।

परियोजना के राज्य प्रभारी आशीष नेगी ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश भर में 60 अत्याधुनिक मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयाँ पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर रही हैं। इन वैनों के माध्यम से अब तक रिकॉर्ड 5 लाख से अधिक पशुओं का उपचार किया जा चुका है। उपचारित पशुओं में सबसे बड़ी संख्या गौवंश की है, जिसके अंतर्गत 2.5 लाख गाय और बैलों का इलाज किया गया। इसके अलावा योजना के तहत 1.5 लाख बकरी/भेड़, 40 हज़ार महिषवंश (भैंस), 28 हज़ार श्वान (कुत्ते), 16 हज़ार घोड़े-खच्चर और लगभग 15 हज़ार अन्य प्रजाति के पशुओं को जीवनदान दिया गया है। उन्होंने संकल्प जताया कि भविष्य में भी राज्य के प्रत्येक पशुपालक तक इस सेवा का विस्तार निरंतर जारी रहेगा।

पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इन मोबाइल वैनों को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस किया गया है। प्रत्येक वाहन में प्रशिक्षित एवं अनुभवी पशु चिकित्सक और पैरावेट स्टाफ तैनात रहता है। यह टीम न केवल बीमार पशुओं का मौके पर आपातकालीन उपचार करती है, बल्कि पशुओं के रोगों की रोकथाम, समयबद्ध टीकाकरण, स्वास्थ्य परामर्श और अन्य आवश्यक सेवाएँ भी घर बैठे उपलब्ध करा रही है।
इस अभिनव पहल का सबसे सकारात्मक असर उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। समय पर सटीक इलाज और डॉक्टरी परामर्श मिलने से राज्य में पशुधन की उत्पादकता (दूध उत्पादन आदि) में भारी इज़ाफा हुआ है। पूर्व में समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण जिन पशुपालकों को अपने मवेशियों से हाथ धोना पड़ता था या भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, अब उनकी आर्थिकी सुरक्षित और सुदृढ़ हो रही है।
उत्तराखंड सरकार एवं पशुपालन विभाग की यह अनूठी पहल आज प्रदेश के लाखों पशुपालकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय सिद्ध हुई है। राज्य का कोई भी पशुपालक अपने बीमार पशु के मुफ़्त इलाज के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल कर सकता है। कॉल आते ही जीपीएस (GPS) से लैस मोबाइल वेटरिनरी यूनिट सीधे पशुपालक के घर के लिए रवाना हो जाती है, जिससे सुदूर क्षेत्रों में भी समयबद्ध और सुलभ चिकित्सा सुनिश्चित हो रही है।
सरकार का लक्ष्य अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति और उसके पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियाँ हमेशा से एक चुनौती रही हैं, जहाँ बीमार पशु को अस्पताल ले जाना बेहद कठिन होता था। लेकिन ‘1962 मोबाइल वेटरिनरी सेवा’ ने इस दूरी को मिटा दिया है। मात्र 42 महीनों में 5 लाख से अधिक पशुओं का उनके घर पर मुफ़्त और आधुनिक इलाज होना इस बात का प्रमाण है कि सरकार की नीतियां सही दिशा में काम कर रही हैं। यह सिर्फ पशुओं का इलाज नहीं, बल्कि उत्तराखंड के ग्रामीण परिवारों की आर्थिकी की सुरक्षा की गारंटी है। हम इस सेवा को और अधिक सुदृढ़ और व्यापक बनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध हैं।” सौरभ बहुगुणा पशुपालन मंत्री उत्तराखंड।



