गोदी मीडिया का बहिष्कार: जब जनता का भरोसा टूटा, तो पत्रकारों को उठाना पड़ा विरोध का सामना

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली: जंतर-मंतर और देश के विभिन्न प्रदर्शन स्थलों से लगातार ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहाँ मुख्यधारा के टीवी चैनलों के पत्रकारों को भारी जनविरोध का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों द्वारा ‘गोदी मीडिया वापस जाओ’ के नारे लगाए जा रहे हैं और पत्रकारों को रिपोर्टिंग करने से रोका जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह विरोध किसी संगठन द्वारा प्रायोजित नहीं है, बल्कि यह आम जनता और प्रदर्शनकारियों का स्वतःस्फूर्त गुस्सा है। पिछले एक दशक में सीएए, एनआरसी आंदोलन, किसान आंदोलन और हालिया छात्र आंदोलनों के दौरान टीवी मीडिया के एक बड़े हिस्से ने सत्ता से सवाल पूछने के बजाय प्रदर्शनकारियों की नीयत पर ही सवाल खड़े किए।
इस रवैये के कारण आम लोगों के बीच मीडिया की विश्वसनीयता खत्म हुई है और उसे एक निष्पक्ष ‘वॉचडॉग’ के बजाय ‘प्रचार तंत्र’ के रूप में देखा जाने लगा है। किसी भी लोकतंत्र में पत्रकारों का विरोध होना चिंताजनक है, लेकिन यह स्थिति मुख्यधारा मीडिया के लिए अपनी खोई हुई साख और जनता का भरोसा वापस हासिल करने के लिए आत्ममंथन करने का संदेश है।



