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वादाखिलाफी पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: 5 दिन से जारी नैटवाड़ धरना डीएम के आश्वासन के बाद समाप्त, 31 जुलाई तक मांगी रिपोर्ट

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

मोरी uttarkashi: सतलुज जल विद्युत निगम (SJVN) की मोरी-नैटवाड़ जल विद्युत परियोजना के खिलाफ प्रभावित ग्रामीणों का पांच दिनों से चल रहा धरना-प्रदर्शन आखिरकार डीएम के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया है। वर्ष 2019 में हुए 12 सूत्रीय लिखित समझौते को सात साल बाद भी लागू न करने से आक्रोशित ग्रामीणों ने सतलुज जल विद्युत निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। बुधवार शाम क्षेत्रीय विधायक दुर्गेश्वर लाल के नेतृत्व में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के साथ हुई एक हाई-लेवल बैठक के बाद, ग्रामीणों ने डीएम के ठोस आश्वासन पर अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया।

आपको बताते चलें कि मामला वर्ष 2019 का है, जब निर्माणाधीन 60 मेगावाट की मोरी नैटवाड़ जल विद्युत परियोजना के चलते प्रभावित गांवों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा था। उस दौरान ग्रामीणों ने पुरजोर आंदोलन कर अपनी 12 सूत्रीय मांगें सामने रखी थीं।

प्रमुख मांग 

प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को परियोजना में स्थायी नौकरी।

अधिग्रहित भूमि का उचित और बाजार दर पर मुआवजा।

ब्लास्टिंग के कारण स्थानीय मकानों में आई दरारों की क्षतिपूर्ति।

रूपीन-सूपीन नदी पर बाढ़ सुरक्षा कार्य (तटबंध निर्माण)।

नैटवाड़ क्षेत्र में एक इंग्लिश मीडियम स्कूल और आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना।

परियोजना से प्रभावितों को निशुल्क बिजली की आपूर्ति।

तब तत्कालीन उप महाप्रबंधक आर.के. जगोता ने लिखित समझौता कर आंदोलन शांत कराया था। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि सतलुज जल विद्युत निगम ने इस ‘लिखित वादे’ को ठंडे बस्ते में डाल दिया, जिससे मजबूर होकर उन्हें दोबारा सड़क पर उतरना पड़ा।

बुधवार शाम को जिला मुख्यालय में हुई बैठक में ग्रामीणों की समस्याओं को बेहद गंभीरता से सुना गया। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत एक हाई-पावर जांच समिति गठित करने के निर्देश जारी किए हैं।

इस विशेष समिति की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (ADM) मुक्ता मिश्र करेंगी। समिति में उप जिलाधिकारी (SDM) पुरोला के अलावा, प्रभावित गांवों के 3 प्रतिनिधि और परियोजना पक्ष (SJVN) के 3 प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, ताकि पारदर्शी तरीके से समाधान निकाला जा सके। जिलाधिकारी ने सख्त हिदायत दी है कि समिति सभी विवादित मामलों और भूमि प्रतिकर का बारीकी से परीक्षण कर 31 जुलाई तक अपनी अंतिम रिपोर्ट और समाधान की कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी

इस महत्वपूर्ण बैठक में पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल, ब्लॉक प्रमुख रणदेव राणा, अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र सहित परियोजना प्रबंधन की ओर से अमित शर्मा और नरेश गिरी मौजूद रहे। साथ ही प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में पुरजोर तरीके से अपना पक्ष रखा।

विकास की वेदी पर अपनी जमीन और आशियाने कुर्बान करने वाले ग्रामीणों के सब्र का इम्तिहान भारी पड़ सकता है। सरकारी और अर्ध-सरकारी उपक्रमों को यह समझना होगा कि जल-जंगल-जमीन देने वाले स्थानीय लोग विकास के विरोधी नहीं, बल्कि उसमें उचित हिस्सेदारी के हकदार हैं। अब देखना यह है कि 31 जुलाई की डेडलाइन के भीतर यह कमेटी ग्रामीणों को उनका हक दिला पाती है या यह भी सिर्फ एक और कागजी आश्वासन बनकर रह जाएगा।

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