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आस्था का महाकुंभ : जखोल में उमड़ा जनसैलाब, सोमेश्वर देवता की जातरा हर्षोल्लास के साथ संपन्न

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

​जखोल uttarkashi: बैसाख माह की पावन संक्रांति और वैशाखी के शुभ अवसर पर उत्तरकाशी जनपद के जखोल गांव में ऐतिहासिक ‘बिशु मेला’ पूरी भव्यता के साथ मनाया गया। 22 गांव और तीन पट्टियों (पंचगाई, अडोर और बड़ासू) के आराध्य ईष्ट देव सोमेश्वर महाराज के दर्शनों के लिए क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने शिरकत की।

​धार्मिक अनुष्ठान और देव मिलन

​उत्सव की शुरुआत देवता की डोली को मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकालने के साथ हुई। पारंपरिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बाद डोली को प्रांगण में बने आसन पर विराजित किया गया। इस दौरान पूरा वातावरण ‘सोमेश्वर देवता की जय’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। 22 गांवों से आए भक्तों ने कतारबद्ध होकर देवता का आशीर्वाद लिया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

​सांस्कृतिक छटा और पारंपरिक वाद्ययंत्र

​मेले में स्थानीय लोक संस्कृति के सुंदर रंग देखने को मिले:

• ​देव स्तुति: 22 गांवों से आए बाजगी गणों ने ढोल-दमाऊ, रणसिंघा और धौंस जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर शानदार देव-नृत्य प्रस्तुत किया।

• ​लोक गायन: क्षेत्र की महिलाओं ने मंगल गीत और पारंपरिक रासो व तांदी गीतों से समां बांध दिया, जिससे पूरा जखोल गांव देवत्व और उत्सव के रस में सराबोर नजर आया।

• ​प्रमुख उपस्थिति: इस अवसर पर क्षेत्र के सियाणे, बजीर, पुजारी और बाजगी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से पुजारी रामध्यान, चैन सिंह, कृपाल सिंह, सैबार सिंह तथा स्थानीय निवासी अवतार सिंह, जनक सिंह आदि ने व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई।

​विधायक दुर्गेश्वर लाल ने भी की शिरकत

​इस पावन अवसर पर विधायक दुर्गेश्वर लाल ने भी शिरकत की और देवता का आशीर्वाद लिया। उन्होंने क्षेत्र के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए कई घोषणाएं कीं:

• ​महिला सशक्तिकरण: विधायक ने स्थानीय महिला समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से डीजे सेट, टेंट, कुर्सियां और बर्तन आदि सामग्री भेंट की।

• ​मंदिर निर्माण का संकल्प: उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि जखोल मंदिर निर्माण के मामले में वे सरकार और न्यायालय स्तर पर मजबूती से पैरवी करेंगे और क्षेत्र की जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।

​सोमेश्वर देवता की यह जातरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों की विरासत और 22 गांवों की एकता का भी प्रमाण है। वैशाखी का यह पर्व क्षेत्र के लिए गर्व और खुशहाली का संदेश लेकर आया है।

 

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