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डॉ. महावीर रवांल्टा को मिलेगा ‘बालप्रहरी बाल साहित्य सम्मान-2026’

​'गोलू पढ़ेगा' कृति के लिए डीडीहाट में 14 जून को होंगे सम्मानित

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

​पुरोला/अल्मोड़ा: बाल साहित्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले प्रख्यात साहित्यकार डॉ. महावीर रवांल्टा के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। उन्हें उनकी चर्चित कृति ‘गोलू पढ़ेगा’ के लिए प्रतिष्ठित ‘बालप्रहरी बाल साहित्य सम्मान-2026’ देने की घोषणा की गई है।

बालप्रहरी'(त्रैमासिक) पत्रिका के संपादक एवं बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा के सचिव उदय किरौला की ओर से जारी विज्ञप्ति में उन्हें यह सम्मान जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डीडीहाट(पिथौरागढ़) में आयोजित राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह में 14 जून 2026 को प्रदान किया जाएगा। समारोह में बाल साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय अवदान के लिए देशभर के 10 चयनित बाल साहित्यकारों को स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र व धनराशि भेंटकर सम्मानित किया जाएगा।

​रवांल्टा का साहित्यिक सफर

​अस्सी के दशक से सक्रिय महावीर रवांल्टा ने हिन्दी और रवांल्टी साहित्य को नई ऊंचाइयां दी हैं। उनकी अब तक 46 कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं।

​प्रमुख बाल पुस्तकें:

• ​ननकू नहीं रहा, विनय का वादा, अनोखा जन्मदिन।

• ​जुगनू की पढ़ाई, चल मेरी ढोलक ठुमक ठुम, पोखू का घमंड।

• ​दैत्य और पांच बहिने, ढेला और पत्ता, स्वतंत्रता आन्दोलन की कहानी।

​बहुआयामी व्यक्तित्व:

• ​रंगमंच: उनके नाटकों का मंचन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) की संस्कार रंग टोली द्वारा दिल्ली और देहरादून में किया जा चुका है। उनकी लघुकथा ‘तिरस्कार’ पर लघु फिल्म भी बन चुकी है।

• ​भाषा संरक्षण: उन्होंने रवांल्टी भाषा में लेखन की शुरुआत की और कई महत्वपूर्ण शब्दकोशों एवं भाषा सर्वेक्षणों (वडोदरा, देहरादून, लखनऊ) में अपना योगदान दिया।

• ​लोक साहित्य: ‘गजू-मलारी’ जैसी लोकगाथाओं को नाटकों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया।

बाल साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय अवदान के लिए उन्हें अब तक बाल कल्याण संस्थान, उत्तराखण्ड बाल कल्याण साहित्य संस्थान-खटीमा, उत्तराखण्ड बाल साहित्य संस्थान-अल्मोड़ा (उत्तराखण्ड)बाल कल्याण एवं शोध केन्द्र-भोपाल,शब्द प्रवाह- उज्जैन (म प्र) राजकुमार जैन राजन फाउंडेशन-अकोला,बाल वाटिका-भीलवाड़ा (राजस्थान)पं हरप्रसाद पाठक स्मृति समिति-मथुरा (उ प्र) मातेश्वरी विद्या देवी बाल साहित्य शोध एवं विकास संस्थान-सिरसा(हरियाणा) द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। प्रौढ एवं बच्चों के लिए समान रूप से लेखन कर रहे महावीर रवांल्टा अस्सी के दशक से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। अनेक विश्वविद्यालयों में उनके साहित्य पर शोध एवं लघुशोध प्रस्तुत होने के साथ ही आकाशवाणी व दूरदर्शन से उनकी रचनाओं का प्रकाशन होता रहा है

देशभर की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं प्रकाशित होती रही हैं।आपकी ‘खुली आंखों में सपने’ व ‘ननकू नहीं रहा’ कहानियों पर आधारित नाटकों का राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की संस्कार रंग टोली,कला दर्पण, विशेष बाल श्रमिक विद्यालय, मांडी विद्या निकेतन द्वारा दिल्ली, देहरादून व खुर्जा में मंचन हो चुका है। रंगकर्म में गहरी रुचि के चलते अनेक नाटकों के लेखन के साथ ही आपने अभिनय व निर्देशन भी किया है।भाषा-शोध एवं प्रकाशन केन्द्र-वडोदरा (गुजरात) के भारतीय भाषा लोक सर्वेक्षण, उत्तराखण्ड भाषा संस्थान देहरादून के भाषा

सर्वेक्षण, पहाड़ (नैनीताल) के बहुभाषी शब्दकोश ‘झिक्कल काम्ची ओडायली’,सेल (सोसायटी फार इंडेजर्ड एंड लेस नान लैंग्वेजेस)-लखनऊ के भाषा प्रलेखन एवं शब्दकोश निर्माण कार्यशाला में रवांल्टी पर काम कर चुके महावीर रवांल्टा को रवांल्टी में लेखन की शुरुआत का श्रेय भी जाता है।रवांई क्षेत्र के लोक साहित्य के संकलन व प्रकाशन के साथ ही रवांई क्षेत्र की लोकगाथा ‘गजू-मलारी’ पर ‘एक प्रेमकथा का अंत’,लोककथा ‘रथ देवता’ पर ‘सफेद घोड़े का सवार’ व ‘बदला’ पर ‘धुएं के बादल’ जैसे नाटकों का लेखन कर उन्होंने अपने लोक से हिन्दी जगत को परिचित कराते हुए अभिनव प्रयोग किए हैं। हिन्दी साहित्य जगत को उपन्यास, लघुकथा, कहानी, नाटक, व्यंग्य, कविता,लोक साहित्य,बाल साहित्य जैसी विधाओं के माध्यम से 46 कृतियां दे चुके हैं और उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान-गोविन्द पुरस्कार-2022 सहित सहित देशभर से अनेक सम्मान उन्हें मिल चुके हैं। उनकी लघुकथा ‘तिरस्कार’ पर लघु फिल्म का निर्माण हो चुका है।

​वर्तमान कार्यभार: साहित्य साधना के साथ-साथ रवांल्टा वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पुरोला में मुख्य फार्मेसी अधिकारी के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि पर साहित्य जगत और स्थानीय क्षेत्र में खुशी की लहर है।

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