Featuredउत्तराखंडउत्पीड़नटिहरीनैनीतालपुलिस

केशव मामले में हाईकोर्ट सख्त, मेडिकल जांच में केशव निकला जीनियस : धर्मेन्द्र रौतेला का भी होगा स्वास्थ्य परीक्षण 

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

नैनीताल: उत्तराखंड के चर्चित केशव थलवाल मामले में आज नैनीताल हाईकोर्ट में हुई सुनवाई ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने पुलिस के व्यवहार को लेकर बेहद तीखी टिप्पणियां कीं और स्पष्ट किया कि अदालत किसी भी सूरत में मानवाधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं करेगी।

​”केशव बहुत बुद्धिमान और तेज है”: जस्टिस थपलियाल

​न्यायमूर्ति थपलियाल ने केशव थलवाल की मानसिक स्थिति पर पुलिस के दावों को खारिज करते हुए कहा, “रिपोर्ट के अनुसार वह बहुत बुद्धिमान (Intelligent), बहुत तेज (Sharp) और स्मार्ट है। वह गलत चीज को बर्दाश्त नहीं करता और भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ है।” कोर्ट ने पुलिस से सवाल किया कि आखिर ऐसे व्यक्ति के खिलाफ इतने मुकदमे क्यों दर्ज किए गए?

​पुलिस की “थ्योरी” फेल, मेडिकल रिपोर्ट में केशव फिट

​पुलिस ने पूर्व में तर्क दिया था कि केशव थलवाल की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा, “आपने कहा था कि इसकी मेंटल कंडीशन ठीक नहीं है, हमने उसका मेडिकल करा दिया और वह बिल्कुल फिट निकला। अब अगला कदम क्या होगा?”

​पैर में सर्जरी के बावजूद मारपीट का आरोप

​न्यायमूर्ति ने कोर्ट में केशव के पैरों की फोटोग्राफ्स दिखाते हुए भारी नाराजगी जताई। उन्होंने फोटोग्राफ्स दिखते हुए कहा कि उसके बाएं पैर में पहले से सर्जरी हो रखी थी, फिर भी मार-मारकर आपने पैर की क्या हालत कर दी है! यह हम नहीं होने देंगे।”

​कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि एक पुलिस अधिकारी का व्यवहार अमानवीय (Inhuman) है, तो क्यों न उसका भी मानसिक और मेडिकल टेस्ट कराया जाए? कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा, “जैसे हमने केशव का टेस्ट कराया, वैसे ही अब पुलिस अधिकारी का भी मेडिकल टेस्ट कराते हैं।”

​रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

• ​कोर्ट की टिप्पणी: केशव थलवाल एक जागरूक नागरिक है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है।

• ​पुलिस को फटकार: आरोपी के पैर में चोट और सर्जरी के बावजूद उसके साथ हुई मारपीट पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।

• ​भविष्य की कार्यवाही: कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं, जिसमें सस्पेंशन तक की बात कही गई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button