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किसानों के हक में सड़क पर उतरा जनसैलाब; ‘किसान अधिकार रैली’ में उठी कर्जमाफी और विशेष पर्वतीय पैकेज की मांग

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

​पुरोला,uttarkashi: रवांई घाटी के किसानों की समस्याओं और जायज मांग को लेकर यहां पुरोला के खेल मैदान में एकत्रित हुए लोगों ने यहां नगर में ‘किसान अधिकार रैली का आयोजन कर मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है।

किसान विकास संगठन के बैनर तले आयोजित इस रैली में सैकड़ों किसानों, बागवानों और स्थानीय नागरिकों ने पुरजोर आवाज उठाते हुए सरकार से किसानों के हित में ठोस व समयबद्ध निर्णय लेने की मांग की। अन्नदाता का सम्मान, किसान का अधिकार” के गगनभेदी नारों के साथ किसानों ने नगर क्षेत्र में रैली निकाली और मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार एवं प्रधानमंत्री भारत सरकार को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया।

ज्ञापन में उठाई गईं प्रमुख मांगें:

1. ​ऋण माफी: राज्य के लघु, सीमांत और जरूरतमंद किसानों के कृषि ऋण तत्काल प्रभाव से माफ किए जाएं ताकि उन्हें कर्ज के बोझ से राहत मिल सके।

2. ​फसल क्षति का त्वरित मुआवजा: लगातार होने वाली प्राकृतिक आपदाओं और जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान का तुरंत निष्पक्ष सर्वे कराकर वास्तविक क्षति के अनुरूप मुआवजा दिया जाए।

3. ​किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी: बढ़ती महंगाई और कृषि लागत को देखते हुए पीएम किसान सम्मान निधि की राशि को दोगुना किया जाए।

4. ​किसान पेंशन में वृद्धि: बुजुर्ग एवं जरूरतमंद किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसान पेंशन में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए।

5. ​पारंपरिक व बागवानी उत्पादों का लाभकारी मूल्य: पर्वतीय क्षेत्र के प्रमुख उत्पादों जैसे लाल धान (लाल चावल), मंडुवा, झंगोरा, राजमा, दालें, सेब, मौसमी फल एवं सब्जियों के लिए सुनिश्चित लाभकारी समर्थन मूल्य तय किया जाए।

6. ​विशेष पर्वतीय कृषि पैकेज: पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्नत बीज, खाद, सिंचाई साधन, कृषि यंत्र और बागवानी के विकास के लिए एक विशेष कृषि सहायता पैकेज लागू किया जाए।

​रैली के संयोजक व पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष हरिमोहन सिंह नेगी तथा किसान विकास संगठन के जिलाध्यक्ष प्रकाश कुमार डबराल ने कहा कि आज का किसान बढ़ती उत्पादन लागत, मौसम की मार और जंगली जानवरों के आतंक से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को आर्थिक सुरक्षा व सम्मान दिलाना सरकार की पहली जिम्मेदारी है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इन मूलभूत व न्यायसंगत मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा।

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