उत्तरकाशीउत्तराखंडराज्य आंदोलनकारी

राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण में हीलाहवाली पर आक्रोश: 15 सितंबर तक निस्तारण न होने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी

​तहसील स्तर पर आमजन के प्रमाणपत्र बनाने में सीएससी सेंटरों की मनमानी पर रोक लगाने की भी उठाई मांग

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

​मोरी,uttarkashi; उत्तराखंड राज्य निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देने वाले आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया में हो रही कथित प्रशासनिक लापरवाही और देरी को लेकर आंदोलनकारियों का आक्रोश फूट पड़ा है। ‘चिन्हित उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी समिति’ मोरी द्वारा जिलाधिकारी उत्तरकाशी को भेजे ज्ञापन में अल्टीमेटम दिया गया है कि यदि 15 सितंबर तक उनके मामलों का अंतिम निस्तारण नहीं किया गया, तो वे 16 सितंबर से तहसील एवं जिला स्तर पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करने को बाध्य होंगे।

समय सीमा बीतने के करीब, फिर भी सूची सार्वजनिक नहीं

​समिति के अध्यक्ष विपिन सिंह चौहान, महासचिव अनिल कुमार राणा और कोषाध्यक्ष प्रताप सिंह चौहान के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि शासन द्वारा राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की तिथि को विस्तारित करते हुए 23 सितंबर तक का समय दिया गया है। इससे पूर्व 11 मई और 21 मई को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय चिन्हीकरण समिति की बैठकों में मोरी व पुरोला के 23 राज्य आंदोलनकारियों के दस्तावेजों की गहन समीक्षा व सत्यापन कराया गया था। उस दौरान प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई कर पत्रावली शासन को भेजने का आश्वासन दिया था। आंदोलनकारियों का आरोप है कि विस्तारित समय सीमा समाप्त होने को है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से अब तक चिन्हीकरण सूची को सार्वजनिक नहीं किया गया है। इससे आंदोलनकारियों में भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

विभागीय लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे आंदोलनकारी

​ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2017 और वर्ष 2021 में भी विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही के कारण मोरी व पुरोला के आंदोलनकारियों के दस्तावेज समय पर शासन को नहीं भेजे जा सके, जिसके चलते पात्र आंदोलनकारी चिन्हीकरण से वंचित रह गए। समिति ने कहा कि बार-बार की प्रशासनिक देरी के कारण आंदोलनकारियों को समय, धन और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।

सीएससी सेंटरों पर मनमानी व आमजन के कार्यों में देरी का मुद्दा भी उठाया

​तहसीलदार मोरी को सौंपे एक अन्य ज्ञापन में समिति ने तहसील स्तर पर आम जनता के कार्यों में हो रही देरी का मामला भी प्रमुखता से उठाया। समिति का कहना है कि आम जनता और आंदोलनकारियों के आवेदन पत्र व डाक संबंधित कर्मचारी समय पर नहीं ले रहे हैं, जिससे प्रमाण पत्र बनने में अत्यधिक विलंब हो रहा है। आय, जाति, स्थायी निवास एवं चरित्र प्रमाण पत्रों के लिए आवश्यक संलग्नकों (दस्तावेजों) को लेकर शासन के स्पष्ट शासनादेश (GO) का पालन नहीं किया जा रहा है कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालक मनमाने ढंग से दस्तावेज मांग रहे हैं, जिससे ग्रामीण जनता का समय व पैसा बर्बाद हो रहा है।

​समिति ने मांग की है कि सभी जरूरी सेवाओं के शुल्क, समय सीमा और आवश्यक दस्तावेजों का विवरण सूचना पट और सीएससी केंद्रों पर चस्पा किया जाए।

​समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि 15 सितंबर तक मोरी क्षेत्र के आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण का निस्तारण कर सूची सार्वजनिक नहीं की जाती है, तो 16 सितंबर से तहसील मोरी और जिला मुख्यालय पर व्यापक आंदोलन व धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष विपिन सिंह चौहान, महासचिव अनिल कुमार राणा, कोषाध्यक्ष प्रताप सिंह चौहान, चमन सिंह, सिलदार सिंह, जयवीर सिंह, राजेंद्र प्रसाद नौटियाल सहित कई पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।

 

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