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राज्य में उत्कृष्ट कार्य करने पर 1962 पशु एंबुलेंस सेवा बहादराबाद एवं सहसपुर की टीम को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

देहरादून Uttarakhand: राज्य में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु 1962 पशु एंबुलेंस सेवा बहादराबाद हरिद्वार की टीम को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। विकासखंड प्रभारी डाॅक्टर मनीषा पोखरियाल सहित टीम को इस कार्य हेतु राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया गया।

राज्य में 1962 पशु एंबुलेंस सेवा को उसके बेहतरीन कार्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने हेतु राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद के बहादराबाद एवं देहरादून के सहसपुर विकासखंड की टीम को लाइलाज मवेशियों को बचाने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उपरोक्त टीमों को राष्ट्रीय अवार्ड मिलने पर पशुपालन के क्षेत्र में 1962 पशु एंबुलेंस सेवा को एक क्रांति माना जा रहा हैं। इस सेवा से पशुपालकों को घर पर ही पशुओं को समय पर इलाज और आपातकालीन सहायता प्रदान की जा रही हैं। यह हेल्पलाइन देशभर में पशुओं के लिए एक जीवन रक्षक सेवा बन गई हैं।

हरिद्वार जनपद के बहादराबाद विकासखंड में 1962 पशु चिकित्सा वाहन टीम द्वारा लाइलाज बीमारी से ग्रसित एक भैंस का सफल उपचार करने पर टीम को नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया। बहादराबाद टीम की प्रभारी डॉक्टर मनीषा पोखरियाल, फार्मासिस्ट अमित और चालक राहुल को एक समारोह में नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। समारोह में एंबुलेंस सेवा के राज्य प्रभारी आशीष नेगी ने कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना हम सब के लिए बहुत ही गर्व की बात है कि हमारे प्रदेश के चिकित्सकों और कर्मचारियों को यह सम्मान मिला। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरी टीम की मेहनत का परिचय है। उन्होंने कहा कि 1962 पशु चिकित्सा वाहन सेवा पर इसी तरह लोगों का भरोसा बना रहें। यह सम्मान राज्य के पशुपालन विभाग और एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों के लिए भी एक प्रेरणा है। इस अवसर पर एंबुलेंस सेवा के जिला प्रभारी नीला सिंह भी मौजूद थे।

1962 पशु एंबुलेंस सेवा के बारे में जानकारी 

• टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल करके आप अपने बीमार पालतू या आवारा पशुओं के लिए एंबुलेंस बुला सकते हैं।

• यह सेवा कॉल करने वाले के घर पर पहुंचती है, जिससे पशुओं को अस्पताल ले जाने की परेशानी नहीं होती।

• एंबुलेंस में एक पशु चिकित्सक, एक पैरामेडिकल स्टाफ और एक ड्राइवर होता है, जो मौके पर ही प्राथमिक उपचार, जांच एवं सर्जरी भी करते हैं।

इस सेवा की हर जगह प्रशंसा हो रही है, क्योंकि यह जरूरतमंद पशुओं को तत्काल चिकित्सा सहायता देकर उनकी जान बचा रही है।1962 पशु एंबुलेंस सेवा सिर्फ एक हेल्पलाइन नहीं, बल्कि लाखों पशुओं के लिए एक जीवनरेखा बन गई है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने एवं पुरस्कार मिलना इस बात का प्रमाण है कि यह कितनी प्रभावी है।

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