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पुरोला विधानसभा के सुदूरवर्ती स्वास्थ्य केंद्रों में नही हैं चिकित्सक, कुछ अस्पतालों को देख रहे हैं फार्मासिस्ट : फार्मासिस्टों को भी सुविधाजनक स्थान पर स्थानांतरित करने को अधिकारियों पर दबाव 

पत्रिका न्यूज नेटवर्क 

मोरीuttarkashi: मोरी ब्लॉक के सुदूरवर्ती क्षेत्र के अधिकांश चिकित्सालयों में चिकित्सक नही है, कुछ अस्पतालों को फार्मासिस्ट देख रहे हैं लेकिन कुछ प्रभावशाली लोग इन फार्मासिस्टों को भी सुविधाजनक स्थान पर स्थानांतरित करने पर लगे हुए हैं।

पूर्व मंत्री स्व0 बरफिया लाल जुवांठा ने अविभाजित उतर प्रदेश के समय उतरकाशी जनपद के सुदूरवर्ती क्षेत्र गंगाड़, तालुका, फिताड़ी, लिवाड़ी, टिकोची आदि क्षेत्रों में ग्रामीणों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कुछ आयुर्वेदिक एवं एलोपैथिक चिकित्सालयों की स्थापना की थी, जिससे लोगों को प्राथमिक उपचार गांव में ही मिल सके। स्व0 जुवांठा ने उत्तरकाशी ही नही पूरे उत्तराखंड में धारचुला, मुनस्यारी से लेकर नीती माणा तक विकास की अमिट छाप छोड़ी थी, जिससे लोगों ने उन्हे विकास पुरूष की उपाधि से सम्मानित किया था, लेकिन आज नेता इन चिकित्सालयों को संचालित करना तो दूर, बंद करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहें हैं।

आयुर्वेदिक चिकित्सालय फिताड़ी में एक फार्मासिस्ट तैनात है जोकि यहां कभी कभार ही आते है। बताया जाता है कि इस फार्मासिस्ट पर एक नेता जी का पूरा आशीर्वाद बना हुआ है, गत वर्ष राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय फिताड़ी में राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण न करने पर इस फार्मासिस्ट के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो रही थी, जिसको रोकने के लिए नेता जी ने पूरा जोर लगाया। इतना ही नही आयुर्वेदिक चिकित्सा के कुछ उच्च अधिकारियों ने बताया कि इस महाशय ने उपरोक्त फार्मासिस्ट को फिताड़ी से हटाकर जनपद के किसी अन्य सुविधाजनक स्थान पर स्थानांतरित करने का दबाव भी बनाया था, लेकिन जनपद में कहीं भी पद रिक्त न होने के कारण अधिकारी ऐसा नहीं कर पाएं।

आयुर्वेदिक चिकित्सालय फिताड़ी में चिकित्सक नही है, यहां एक चतुर्थ श्रेर्णी कर्मचारी सहित एक फार्मासिस्ट तैनात है, इसके नजदीक के गांव एलोपैथिक चिकित्सालय लिवाड़ी में भी चिकित्सक नही है। अगर इन अस्पतालों में चिकित्सक होते तो शायद कासला गांव की प्रसव पीड़िता की गत दिनों जान नही जाती। नेता लोग स्टाफ तैनात करने की बजाए यहां तैनात स्टाफ को हटाने की पैरवी कर रहे हैं, क्योंकि इन्हे गांव से क्या मतलब, इनके बच्चे तो शहरों में रहते हैं।

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