रवांई : ओलावृष्टि ने बरपाया कहर; मोरी, पुरोला और नौगांव में सेब के बगीचे और फसलें तबाह

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
पुरोलाUTTARKASHI: रवांई घाटी में मौसम के बदले मिजाज ने किसानों और बागवानों की कमर तोड़ दी है। मोरी, पुरोला और नौगांव ब्लॉक के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई भीषण ओलावृष्टि से सेब के बगीचों और तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा मार मोरी ब्लॉक के जखोल और आसपास के क्षेत्रों में पड़ी है, जहाँ सेब के पेड़ों पर आई बहार (फ्लावरिंग) ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई।
इन दिनों बगीचों में सेब की फ्लावरिंग का काम चरम पर था, जिससे बागवानों को बेहतर फसल की उम्मीद थी। लेकिन अचानक हुई भारी ओलावृष्टि ने कुछ ही मिनटों में सब कुछ तहस-नहस कर दिया। ओलों की मार से पेड़ों पर लगे फूल और कलियां पूरी तरह झड़ गई हैं। बागवानों का कहना है कि फ्लावरिंग नष्ट होने का सीधा मतलब है कि इस साल सेब की पैदावार न के बराबर होगी। बगीचों पर निर्भर सैकड़ों परिवारों के सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
क्षेत्र में सिर्फ बागवानी ही नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में भी प्रकृति का प्रकोप देखने को मिला है। पुरोला ब्लॉक के करड़ा, धड़ौली कुमोला, पुजेली, मखना सहित दर्जनों गाँवों में भी ओलावृष्टि ने तांडव मचाया। ओलावृष्टि से सेब, गेहूं, मटर और तैयार खड़ी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है।
”हमारी साल भर की मेहनत मिट्टी में मिल गई है। सेब के फूल झड़ने से अब पेड़ों पर फल लगने की कोई उम्मीद नहीं बची है। प्रशासन को जल्द ही टीम भेजकर नुकसान का जायजा लेना चाहिए।” किशन सिंह रावत बागवान जखोल गांव।



